राज्य के सीमा विस्तार में देवी अहिल्याबाई ने नए कीर्तिमान गढ़े: डॉ. प्रतिभा चतुर्वेदी

Jun 28 2024

मुरैना। विषम परिस्थितियों में भी देवी अहिल्याबाई होलकर ने अपने जीवन के सभी पड़ावों पर नैतिक कर्तव्यों का पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निर्वहन किया। उन्होंने पुत्री, पुत्रवधु और राजधर्म का पालन करते हुए सभी को न केवल न्याय शुलभ कराया बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए युद्ध कौशल में परिपूर्ण कराया। यह बात स्वावलंबी भारत अभियान की अखिल भारतीय महिला कार्य प्रमुख डॉ. प्रतिभा चतुर्वेदी ने सरस्वती शिशु मंदिर के शिक्षा नगर सभागार में आयोजित पुण्य श्लोका देवी अहिल्याबाई होलकर जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के शुभारंभ समारोह में मुख्य वक्ता की आसंदी से कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता आयोजन समिति के अध्यक्ष अतुल माहेश्वरी ने की। विशिष्ट अतिथि महापौर शारदा सोलंकी एवं बलराम दास महाराज (बघेल बाबा चित्रकूट) थे। 
मुख्य वक्ता डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि अहिल्याबाई की 299वीं जन्मतिथि पर वर्ष भर कार्यक्रम आयोजित कर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला जाएगा। उन्होंने कहा कि राजधर्म का पालन करते हुए राज्य की आर्थिक दशा सुधारने के लिए बेहतर अर्थ नीति बनाई और खजाने को सुदृढ़ करते हुए राज्य के सीमा विस्तार में नए कीर्तिमान गढ़े। 
वहीं सांसारिक जीवन में समन्वय बनाते हुए संस्कृति और धर्म को मजबूत करने के लिए न केवल अपने राज्य में बल्कि समूचे भारत वर्ष के विभिन्न क्षेत्रों में मंदिरों का निर्माण और जीर्णोद्धार कराया। कार्यक्रम को महापौर शारदा सोलंकी ने भी संबोधित किया। साथ ही घोषणा की कि मुरैना के जीवाजीगंज स्थित पार्क को अहिल्याबाई के नाम से घोषित किया जाएगा। कार्यक्रम के आरंभ में कृष्णा सोनी ने इतिहास गा रहा है गीत प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत शॉल, श्रीफल एवं अहिल्याबाई की प्रतिमा भेंटकर किया गया। कार्यक्रम की प्रस्तावना आयोजन मंडल के सदस्य डॉ. योगेन्द्र मावई ने रखी। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती पूनम डंडौतिया ने किया।