आदर्श कार्यकर्ता बनने के लिए आत्मप्रबंधन आवश्यक:रामेंद्र घुरैया

Jun 23 2024

ग्वालियर। अखिल भारतीय सेवा संगठन सेवा भारती मध्यभारत प्रांत के विविध प्रकल्पों के प्रबंधक अधीक्षक एवं प्राचार्य का दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग डबरा के सेवाभारती वनवासी हाई स्कूल में उद्घाटन सत्र के साथ प्रारंभ हुआ। वर्ग में कार्यकर्ता के गुण एवं विकास विषय पर बोलते हुए राष्ट्रीय सेवाभारती के अखिल भारतीय सदस्य रामेंद्र सिंह घुरैया ने कार्यकर्ता के गुणों के बारे में विस्तार से चर्चा की। 
सर्वप्रथम वर्ग में उपस्थित सभी प्रशिक्षणार्थियों को चार समूहों में वर्गीकृत कर कार्यकर्ता के गुण एवं विकास विषय पर चर्चा के लिए भेजा तत्पश्चात सभी समूहों से एक-एक प्रतिनिधियों ने आदर्श कार्यकर्ताओं के गुण बताएं। कार्यकर्ताओ के द्वारा बताए गए सभी गुणों को आत्मसात करने के साथ ही श्री रामेंद्र ने बताया कि हमारे कार्यकर्ता को विभिन्न 8 गुणों से भी संपन्न होना चाहिए यदि किसी कार्यकर्ता में यह आठ गुण हैं तो वह समाज के लिए लोक उपयोगी उपकरण साबित हो सकता है। 
 रामेंद्र ने कहा कि कार्यकर्ता को समाज में संगठन की विश्वसनीयता को स्थापित करने के लिए कार्यकर्ता को भी स्वयं को विश्वसनीय उपकरण के रूप में स्थापित करना चाहिए समाज में कार्यकर्ता जितना विश्वासनीय होगा संगठन का विस्तार उतना शीघ्र होगा। 
वर्ग के उद्घाटन सत्र में सेवा भारती के प्रांतीय संगठन मंत्री सुरेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि किस प्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार ने जीवन में उत्कृष्ट अध्ययन का लक्ष्य रखते हुए सेवा का मार्ग अपनाया। उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में कोलकाता में जाकर पढ़ाई की और वहां भी दामोदर नदी में बाढ़ आने पर अपने सहपाठियों के साथ जाकर सेवा का कार्य आरंभ किया। इसलिए प्रत्येक कार्यकर्ता को उच्च शिक्षित और आदर्श जीवन के साथ समर्पित सेवाभावी होना बहुत जरूरी है। 
उन्होंने बाबा आमटे के जीवन की घटना बताई कि वे किस प्रकार से स्वयं कुष्ठ रोगी होकर भी सहस्त्रों कुष्ठ रोगियों के लिए प्रेरणा बन गए और चंपा में उन्होंने कितना बड़ा कुष्ठ रोग प्रकल्प खड़ा कर दिया। 
वर्ग के तीसरे सत्र में सेवा भारती के संस्थापक स्वर्गीय विष्णु कुमार के जीवन के प्रसंग को रखते हुए संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता देवेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि स्वर्गीय विष्णु कुमार बहुत ही सेवाभावी थे, वे छात्रावास में पढऩे वाले प्रत्येक बच्चे को स्वयं से ज्यादा प्रेम और स्नेह देते थे। वे सदैव सेवा भारती के लिए समाज से सहयोग लेने के लिए कोई संकोच नहीं करते थे। उनके अंदर एक आदर्श माता-पिता के गुण विद्यमान थे, वे जहां-जहां संस्कार केंद्र चलते हैं वहां जब भी कभी जाते थे तो लोग उन्हें गुरुजी कहकर अपने घर बुलाते थे समाज के लोगों को सेवा भारती से जोडऩे के आग्रह में कोई संकोच नहीं करते थे। 
कार्यक्रम में सेवा भारती के नवल किशोर शुक्ला, डॉ. प्रकाश लोहिया, निर्मलदास नारंग सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।