इंदौर में घायल हुए रौनक अग्रवाल की मौत, ग्वालियर में अंतिम संस्कार हुआ

Jun 13 2024

ग्वालियर। शहर के व्यापारी सुनील अग्रवाल के सीए (चार्टट अकाउंटेंट) बेटे रौनक अग्रवाल का शव परिजन इंदौर से लेकर गत देर रात ग्वालियर पहुंचे। गुरुवार सुबह नया बाजार अरगड़े की गली से रौनक अग्रवाल की पार्थिव देह को अंतिम संस्कार के लिए लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम के लिए ले जाया गया। यहां अंतिम संस्कार किया गया। 10 जून को नोएडा से इंदौर जाते समय सीए रौनक अग्रवाल की कार आगर-मालवा में ट्रक से टकरा गई थी। वे गंभीर रूप से घायल हुए थे। गत रोज दोपहर इलाज के दौरान इंदौर में दम तोड़ दिया था।
रौनक नोएडा की एक एमएनसी (मल्टी नेशनल कंपनी) में बतौर सीए पदस्थ थे। वे परिवार के साथ रहना चाहते थे, इसलिए नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। 30 जून को उनका कंपनी में आखिरी दिन था। यह कोई नहीं जानता था कि वे इस तरह ऐसे छोडक़र हमेशा के लिए चले जाएंगे।
रौनक अग्रवाल (29) की शादी एक साल पहले 23 जून 2023 को इंदौर में हुई थी। इंदौर में उनकी ससुराल है। 23 जून को पहली एनिवर्सरी है। इसे वे धूमधाम से मनाने की सोच रहे थे। पत्नी और मां-पिता भी इंदौर खरीदारी करने के लिए गए थे। यही सोचकर वे भी परिवार के पास पहुंचने की जल्दबाजी में कार टैक्सी से ही नोएडा से इंदौर के लिए निकल पड़े थे।
आगरा-मालवा में हाईवे पर रौनक की कार में तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी थी। रौनक और कार ड्राइवर गंभीर घायल हुए थे। रौनक को आगर के अस्पताल से परिजन इंदौर ले गए, जहां उन्होंने 12 जून को दम तोड़ दिया, जबकि कार ड्राइवर के दोनों पैर काटने पड़े हैं।
व्यापारी सुनील अग्रवाल ने बताया कि रौनक के छोटे भाई मोहक अग्रवाल की शादी 12 जुलाई को होनी है। छोटे भाई की शादी में हर तैयारी वे खुद करना चाहते थे। खरीदारी से लेकर बैंड-बाजे और मेन्यू में क्या रहेगा, सबकुछ तय करने वाले थे। शादी की खरीदारी के लिए पूरा परिवार इंदौर गया था। रौनक का कहना था कि वे पूरे परिवार के साथ इंदौर में ही खरीदारी करने आ रहे हैं। उनकी पत्नी पहले से ही इंदौर अपने मायके में थी।
रौनक अग्रवाल के निधन की खबर से व्यापारी जगत में शोक की लहर है। व्यापारी सुनील अग्रवाल के घर अरगड़े की गली नया बाजार में सन्नाटा पसर गया है। लोग एक ही बात कर रहे हैं कि यह हादसा हो कैसे गया? देर रात जब रौनक के शव को लेकर परिजन ग्वालियर पहुंचे तो गली में पसरा सन्नाटा रोने के शोर में डूब गया। हर किसी की आंखें नम थीं। हर मिलने व पहचान वाले का यही कहना था कि यह उम्र जाने की नहीं थी।