अपने स्वार्थ के लिए इंसान कुछ भी करने को तत्पर रहता है:माताजी
May 31 2024
ग्वालियर। आज के समय में इंसान अपने स्वार्थ की पूर्ति के कुछ भी करने को तत्पर रहता है। संसार में दो तरह के स्वार्थी होते हैं, एक संसारी, दूसरा मोक्षमार्गी। संसारी स्वार्थी व्यक्ति काम वासना और भौतिकता की चकाचौंध में डूबा रहता है, जबकि मोक्षमार्गी स्वार्थी व्यक्ति भगवान और गुरु की भक्ति करता है। संसारी स्वार्थी को अपना परिवार और मोक्षमार्गी को पूरा संसार दिखता है। यह उदगार गणिनी आर्यिकाश्री विज्ञमती माताजी ने शुक्रवार को चम्पाबाग धर्मशाला में व्यक्त किए।
माताजी ने कहा कि अधिकांश इंसान स्वार्थ की जिंदगी जी रहा है। वह मंदिर जाता है तो स्वार्थ के लिए, गुरु की शरण में जाता है तो मनोकामनाओं की पूर्ति की इच्छा लेकर। जहां अपने कार्य की सिद्धि होने की संभावना होती है, मनुष्य वहां दौड़ जाता है। जहां उसकी इच्छा पूरी नहीं होती, वहां जाने का समय नहीं होता। पूरा संसार स्वार्थ के वशीभूत होता जा है। जब पुण्य कर्म का समय होता है तो परिजन आगे-पीछे घूमते हैं, लेकिन जब पाप कर्म का उदय होता है तो सब दूर हो जाते हैं। पक्षी भी हरे-भरे पेड़ पर रेन बसेरा करता है, जब उसके पत्ते झड़ जाते हैं तो पक्षी उस पर बैठते भी नहीं!
समाज के प्रवक्ता ललित जैन ने बताया पूज्य माताजी के भक्त महेशचंद जैन दलाल का आयोजक कमेटी द्वारा तिलक लगाकर पगड़ी पहनाकर सम्मान किया गया।
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
MP Info News
Invalid RSS feed URL.
ब्रेकिंग न्यूज़
विज़िटर संख्या
अन्य ख़बरें
-
-
-
*हेमू कालानी जन्मोत्सव मिष्ठान वितरण कर बनाया* *
—03/23/2019 -









