एसयूसीआई कम्युनिस्ट द्वारा जनसुविधाओं में शुल्क वृद्धि का कड़ा विरोध

May 25 2024

ग्वालियर। एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) पार्टी के मप्र राज्य सचिव कामरेड प्रताप सामल ने प्रदेश सरकार द्वारा नगरीय निकायों के माध्यम से पानी, सीवर, कचरा कलेक्शन के शुल्क में बेतहाशा वृद्धि की घोषणा पर तीव्र विरोध दर्ज किया है। उन्होंने कहा है कि चुनाव तक जनता से ढेरों लुभावने वादे और घोषणाएं करने वाली सत्तासीन भाजपा ने चुनाव के परिणामों का इंतजार तक किये बिना वोट डलते ही अपना वास्तविक चेहरा दिखा दिया है। 
प्राप्त जानकारी  के मुताबिक पानी का शुल्क 150 से बढ़ाकर 589 रु, सीवर चार्ज 116 से बढ़ाकर 353, कचरे उठाने के लिए 375 रुपये प्रति माह के भारी भरकम शुल्क आम लोगों के ऊपर थोपने की तैयारी है। बहुत जल्द संपत्ति कर बढ़ाने की घोषणा भी होने जा रही है। 
साथ ही तथा कथित अवैध कॉलोनियों को वैध करने के नाम पर जनता पर और नए शुल्क थोपने की भी तैयारी है। उन्होंने कहा कि यह कहाँ का न्याय है कि सरकार केवल टैक्स वसूल करेगी और उसके बदले में जनता को कुछ नहीं देगी।
मध्य प्रदेश में लोगों की आर्थिक स्थिति पर कैग की रिपोर्ट अनुसार यहाँ 37 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं। बेरोजगारी की स्थिति भयावह है। जिस प्रदेश की आथी आबादी दो समय खाने के लिए जूझ रही है। 
कुपोषण की वजह से बच्चों और गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर देश में शीर्ष पायदान पर हो, उसे मात्र गोलियां बांटकर नहीं रोका जा सकता, पौष्टिक आहार ही इसका इलाज है। जो उन्हें उपलब्ध नहीं है, क्योंकि उनकी आमदनी कम है। उसी प्रदेश में सरकार जनता को पानी तक निशुल्क नहीं दे रही हैं, बल्कि उसके शुल्क में चार गुणा वृद्धि कर रही है।
इसके मूल में सरकार की निजी कंपनियों को हर लोक कल्याण के क्षेत्र में भी लाकर अकूत मुनाफा कमाने का अवसर देने की नीति है। पानी को भी मध्य प्रदेश सरकार पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में देना चाहती हैं जो कंपनियों को जनता के ऊपर बेरहम लूट की खुली इजाजत देना है?।
सीवर और कचरा कलेक्शन पहले से ही निजी कंपनियों को ठेके पर दिया जा चुका है, और सम्पूर्ण ठेकाकरण के तहत जनता पर चार्ज बढ़ाए जा रहे हैं, जो कि पूरी तरह अन्याय पूर्ण है।
कामरेड प्रताप सामल ने कहा सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ़ इंडिया कम्युनिस्ट आम नागरिकों की ओर से मांग करती है कि सरकार तुरंत प्रभाव से घोषित की गई वृद्धि को वापस ले।
पानी सहित अन्य सेवाएं  निजी कंपनियों को देने की नीति रद्द करे, साथ ही आम जनता से ये अपील भी की कि वह इन जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सशक्त जनांदोलन संगठित करे।