मूर्तियों को जीवंत करने वाले प्रख्यात मूर्तिकार प्रभात राय नहीं रहे

May 12 2024

ग्वालियर। सजीव मूर्तियों को गढऩे वाले प्रख्यात मूर्तिकार प्रभात राय का निधन गत रात करीब दो बजे हो गया। लोगों के मुताबिक प्रभात राय के निधन से ग्वालियर अंचल सहित देश को क्षति हुई है। उनकी अंतिम यात्रा उनके घर वीरेंद्र विलास से शुरू होकर मोतीझील स्थित प्रभात मूर्ति कला केंद्र पर पहुंची। जहां पर उनके पुत्र ने उन्हें मुख्याअग्रि दी। रविवार सुबह जैसे ही लोग नींद जागे एक बुरी खबर सुनने को मिली। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मूर्तिकार प्रभात राय दुनिया को अलविदा कह गए। उनकी बनाई हुई मूर्तियां देश विदेश में लगी हुई हैं। प्रभात राय के एक बेटा और बेटी है।
जानकारी के मुताबिक मूर्तिकार प्रभात राय पिछले 6 महीनों से पेट की बीमारी से पीडि़त थे। 2 महीने से कुछ ज्यादा की हालत खराब हो गई। गत रात 2 बजे अंतिम सांस लेकर इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
  34 साल का रहा मूर्तिकला का सफर
मूर्तिकार प्रभात राय ने मूर्तिकला के क्षेत्र में ग्वालियर का नाम देश ही नहीं विदेशों में भी रोशन किया। 34 साल पहले उन्होंने मूर्ति निर्माण का काम शुरु किया था। वर्तमान में उनका काम काफी फैल चुका है। राय मोतीझील के पास एक पहाड़ी पर प्रभात मूर्ति कला केंद्र चलाते हैं। यहीं पर वे मूर्तियां तैयार करते थे। उनके कला केंद्र पर अभी भी कई ऐसी प्रतिमाएं अधूरी रह गई हैं। जिन पर प्रभात राय काम कर रहे थे। उनके स्टूडियो में अब पूरी टीम काम कर रही है। मूर्तिकार प्रभात राय को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री राज्यपाल मुख्यमंत्री सहित देश की कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
शिवलिंग की स्थापना के बाद चर्चा में आए थे
प्रभात राय ने गुजरात में स्थापित अष्टधातु से निर्मित एकादशमुखी शिवलिंग का निर्माण अपने स्टूडियो में किया था। महामण्डलेश्वर 16 अप्रैल 2000 में इस शिवलिंग की भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह के साथ भव्य मंदिर में स्थापना की गई थी। ग्वालियर से इस शिवलिंग को पूजा अर्चना के साथ रथ में ले जाया गया था। इस कार्यक्रम के संयोजक रहे चेंबर के पूर्व अध्यक्ष विजय गोयल ने मूर्तिकार प्रभात राय के निधन पर शोक व्यक्त किया है। वहीं कलाकार अनूप शिवहरे ने भी मूर्तिकार प्रभात राय के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
महाराणा प्रताप की मूर्ति से शुरुआत
ग्वालियर शहर में उन्होंने महाराणा प्रताप की विशाल प्रतिमा स्थापित की थी जो गोला का मंदिर पर स्थापित की गई है। इसका अनावरण तत्कालीन प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर ने किया था।
इसके अलावा उन्होंने इंदौर में स्थापित 66 फीट के श्रीहनुमान जी की प्रतिमा बनाई तथा फ्रांस में स्थापित महाराणा रणजीत सिंह की मूर्ति का तथा भोपाल में स्थापित 36 फीट की राजा भोज की प्रतिमा का निर्माण सहित 1600 से अधिक प्रतिमाओं का निर्माण किया। ग्वालियर में सूर्य नमस्कार की प्रतिमाएं, विवेकानंद चौराहा झांसी रोड पर स्थापित प्रतिमा भी प्रभात राय द्वारा बनाई गई थी।