भागवत कथा का समापन हवन एवं भंडारे के साथ

May 12 2024

ग्वालियर। दौलतगंज स्थित राजा बाक्षर की गोठ श्री राजा बाक्षर मंदिर में चल रही भागवत कथा रविवार को संपन्न हो गई। कथा के समापन के हवन यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया गया। भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहले हवन यज्ञ में आहुति डाली और फिर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य कमाया।  
सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पं.घनश्याम शास्त्री महाराज ने श्रीमद भागवत कथा की महिमा बताई। उन्होंने लोगों से भक्ति मार्ग से जुडऩे और सत्कर्म करने को कहा। हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है।
श्रीमद भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। 
पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। हर कथा या अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान का लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। कथा समापन के दिन रविवार को विधिविधान से पूजा करवाई।
भ्रमण पर निकले राजा बाक्षर
हिंदू मुस्लिम एकता के प्रतीक राजा बाक्षर के 97वें उर्स समारोह के अंतर्गत रविवार प्रात: पालकी यात्रा निकाली गई जो कि शहर के विभिन्न मार्गो से होती हुई हुजरात पुल स्थित राजा बाक्षर मंदिर पहुंची। इसके बाद पालकी यात्रा महाराज बाड़ा, रॉक्सी पुल, हुजरात पुल होते हुए वापस दौलतगंज स्थित अपने स्थान पहुंची। पालकी यात्रा का जगह-जगह भक्तगणों द्वारा स्वागत किया गया।