कलश शोभायात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा शुरू

May 11 2024

ग्वालियर। माथे पर पसीने की बूंदे, मन में आस्था का भाव और सिर पर मंगल कलश लेकर पीताम्बर वस्त्रों में जब श्रद्धालु महिलाएं शोभायात्रा में निकली, तो राहगीरों का शीश भी श्रद्धा और भक्ति में झुक गया। चार शहर का नाका गिर्राज मंदिर से 251 कलश की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें कलशधारी महिलाओं के साथ सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। 
कलश यात्रा के बाद सती की बगिया में कथा व्यास पं. रामप्रकाश शास्त्री ने श्रीमद्भागवत कथा का महात्म बताया। कथा व्यास पंडित रामप्रकाश शास्त्री एवं कथा परीक्षत राजाबेटी तोमर बग्घी पर सवार होकर चलीं। इसके साथ भगवान के सुंदर स्वरूपों की झांकी भी शोभायात्रा की शोभा बनी। 
व्यासपीठ से पं. रामप्रकाश शास्त्री ने प्रथम दिवस की कथा आरंभ करते हुए श्रीमद्भागवत का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत सिर्फ एक पोथी नहीं हैं, बल्कि भगवान श्रीमन नारायण का साक्षात् विग्रह है। वेदव्यास ने अपने गुरू नारद की प्रेरणा से श्रीमद्भागवत की रचना की। भागवत भगवान का ब्र्ह्मरूप है और राधारानी भक्ति महारानी। 
जब श्रद्धालु श्रीमद्भागवत का श्रवण करते हैं तो भक्ति महारानी की कृपा होती है। उन्होंने कहा कि जहां पति-पत्नी दोनों समन्वय होता है, वो स्थान घर होता है,लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है तो वह सिर्फ मकान होता है, इसलिए पति पत्नी को एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आप संसारी लोगों से अपनी व्यथा कहोगे तो वे कोई मदद नहीं करेंगे,लेकिन जब अपने प्रभु से अपनी बात कहोगे तो वे जरूर सुनेेंगे।  
इस मौके पर राम तोमर, एडवोकेट अवधेश तोमर, योगेेंद्र सिंह तोमर, जयसिंह सिसोदिया, उल्फत सिंह तोमर, संतोष वैस, अभिषेक तोमर, करन सिंह, भानु वैस, दीपक राठौर, रविंद्र राठौर, राहुल चौहान, हरियोम शर्मा, संतोष सिसोदिया सहित सैकड़े श्रद्धालु मौजूद रहे।