महिलाओं ने शीतला माता से प्रार्थना कर बासी भोजन का भोग लगाया

Apr 01 2024

ग्वालियर। बीमारियों से बचने की कामना के साथ सोमवार को भक्तों ने माता की आराधना की। सुबह से ही शहरभर के माता मंदिरों पर महिलाओं की भारी भीड़ माता की आराधना करने के लिए उमड़ पड़ी। महिलाओं ने माता को बासी भोजन का भोग लगाया जा रहा है। फिर परिवार के लोगों को प्रसादी वितरित की। सोमवार को  शीतला अष्टमी पर घरों में चूल्हा नहीं जलाने की परंपरा है।
महिलाओं ने पूजा के लिए बासोड़ा बीते रोज ही बनाकर तैयार कर लिया था। सुबह स्नान आदि से निपटने के बाद महिलाओं ने इन पकवानों को थालियों में सजाया और उन्हें लेकर मंदिर पहुंची। महिलाओं ने माता की आराधना के लिए बीते रोज खीर-पूड़ी, कचौरी, हलुआ, मालपुए सहित तमाम व्यंजन बनाए थे। जिनका भोग माता को लगाया। कई भक्त वाहनों से रतनगढ़ स्थित माता शीतला के दर्शनों के लिए पहुंचे। आराधना का यह पर्व दो दिनों तक मनाया जाता है।
शीतला अष्टमी के दिन गर्म चीजें नहीं खाई जाती हैं। घर में चूल्हा नहीं जलाने की परंपरा है। एक दिन पहले ही रात में ही सारा भोजन हलवा, गुलगुले, रेवड़ी आदि तैयार कर लिए जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन गर्म पानी से नहाने की भी मनाही है। शीतला अष्टमी के दिन शीतल जल से ही नहाने की परंपरा है। इस पूजा को करने शीतला माता प्रसन्न होती हैं और आशीर्वाद से दाहज्वर, पीतज्वर, विस्फोटक, दुर्गंधयुक्त फोड़े, शीतला की फुंसियां, शीत जनित दोष और नेत्रों के समस्त रोग दूर हो जाते हैं।