रामलीला में केवट संवाद एवं भरत मिलाप का मंचन हुआ

Mar 23 2024

ग्वालियर। आदर्श रामलीला में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण व जानकी अपने गुरु एवं अपने माता-पिता की आज्ञा लेकर वनगमन करते हैं, तो दशरथ अपने मंत्री सुमंत को यह कह कर भेजते हैं कि मेरे बच्चे मेरी आज्ञा का पालन करने के लिए जंगल में जा रहे हैं। तुम इनको थोड़ा सैर करा कर वापस ले आना, तभी आगे आने पर सभी अयोध्यावासी राम जी के रथ को रोक लेते हैं और गाते हुए रोते हैं कि वन चले राम रघुराई और संग जानकी माई सेवा में लक्ष्मण भाई।  तब श्रीराम अपनी माया से अयोध्यावासियों को घोर निद्रा में सोते हुए छोडक़र जंगल में निकल जाते हैं। 
इधर श्रीराम गंगा तट पर पहुंचते हैं और केवट को गंगा पार उतारने को बोलते हैं। श्रीराम और केवट में संवाद के बाद राम उन्हें अपनी संशय दूर करने को बोलते हैं। वो भगवान राम के चरण धोकर जब उन्हें नाव पर बैठाते हैं तो उनके चरणों से धुले हुए जल चरणामत पाकर अपने को धन्य पाते हैं।
उधर अयोध्या में राम के वियोग में राजा दशरथ की मृत्यु हो जाती है। भरत महल पहुंचकर पिताजी के स्वर्गवास का कारण जानकर सबसे पहले मंथरा को धक्के देखकर महल से बाहर करते हैं और अपनी माता कैकई को कोसते हैं। तब गुरु वशिष्ट के कहने पर अयोध्यावासियों को साथ सूर्यवंशी झंडा लेकर चित्रकूट श्रीराम राम लक्ष्मण जानकी को अयोध्या वापस लेने निकल पड़ते हैं। 
लेकिन राम उन्हें अपनी खड़ाई देकर वापस लौटा देते हैं। भरत अपने भाई श्रीराम की पादुका अपने सर पर रखकर वापस अयोध्या लौटते हैं इसी के साथ लीला विराम हो जाती है।