एआईडीएसओ ने अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर छात्र रैली निकाली

Mar 07 2024

ग्वालियर। गुरूवार 7 मार्च को छात्र संगठन एआईडीएसओ की ग्वालियर यूनिट द्वारा 8 मार्च अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान प्रासंगिकता पर छात्र रैली निकाली गई। रैली केआरजी कॉलेज से होती हुई इंदरगंज चौराहे पर पहुंचकर मौजूदा हालातों में सही बदलाव का संदेश और दिशा देने वाले प्रगतिशील गीतों और कविताओं के साथ प्रदर्शन के रूप में तबदील हुई।
 रैली में मुख्य वक्ता एआईडीएसओ जिला उपाध्यक्ष दीपक बरैया ने कहा कि 8 मार्च दुनिया भर में यूरोप की महिला मजदूरों द्वारा अपने अधिकारों को हासिल करने, समान काम- समान वेतन, समान अधिकारों के लिए किए गए खूनी संघर्ष के कुर्बानी दिवस, और शहीद महिला मजदूरों के सम्मान में याद किया जाता है। लेकिन वर्तमान में महिलाओं के इन संघर्षों को पूरी तरह से भुलाया जा रहा है। विश्व स्तर पर ही नहीं, भारत देश में भी संघर्षशील महान महिलाओं का इतिहास रहा है जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज और महिलाओं की बेहतरी के लिए कुर्बान किया।
सावित्रीबाई फुले, रुकैया शेखावत हुसैन, फातिमा शेख, प्रीतिलता वाद्देदार, कल्पना दत्ता जैसी तमाम महान महिलाओं का योगदान रहा है, क्योंकि वे जानती थीं कि किसी भी देश की तरक्की उस देश की महिलाओं की तरक्की के साथ ही तय होती है।
वर्तमान स्थिति में सरकारें इन महिला क्रांतिकारियों और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के ऐतिहासिक क्रांतिकारी संघर्ष को भुला रही है। इसी के नतीजतन हम देख रहे हैं हमारे शहर ग्वालियर छोटे कस्बे, बड़े शहरों में, अपने गांव, घरों- मोहल्ले,  स्कूल-कॉलेजों, हॉस्टल्स, काम के क्षेत्रों में हर जगह ही आज बच्चियाँ -महिलायें मानसिक और शारीरिक प्रताडऩा के माहौल में असुरक्षित महसूसकर रही हैं। 
घरों में घरेलू हिंसा, बाजारों-सडक़ों पर हिंसा, बलात्कार-सामूहिक दुष्कर्म, जैसी दर्दनाक घटनाओं के मूल कारणों जैसे आज भी महिलाओं के प्रति उपभोग वादी, निम्न दर्जे की मानसिकता को देश की वर्तमान सरकारें बखूबी जानती हैं। फिर भी हर दिन नए-नए शराब के ठेके खोलना, अश्लील साहित्य, अश्लील फिल्में, अश्लील गाने तमाम तरीके की मानसिक गंदगी को बढावा दिया जा रहा है। ऐसे एक समय में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से सीख लेते हुए हम सभी अभिभावक, छात्र, नौजवान, महिलाएं, बुजुर्ग सभी संवेदनशील, चिंतनशील आम जनता एक साथ मिलकर महिला और बच्चियों की सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए अपनी पहल पर पुरजोर आंदोलन गठित करें। रैली का संचालन  संध्या पवार और भावना लिखार ने किया। रैली में  प्रीति शाक्य, काजल कुशवाह, आस्था सोनी, मिताली शुक्ला ने भी अपनी बात रखी।