सावरकर परिवार की महिलाओं ने जगाया स्वाभिमान-डॉ. शुभा साठे
Feb 14 2024
ग्वालियर। जिन पत्नियों के पति काला पानी की सजा काटने चले जाएं,। उनके वापस आने की उम्मीद धुंधला जाए, उनके बच्चे छोटी उम्र में ही भगवान को प्यारे हो जाएं और तो और रोज अंग्रेज सिपाही परेशान करने घर आएं, उन पत्नियों के कष्टों का कयास लगा पाना भी कठिन है। ऐसे कष्ट झेलते हुए सावरकर परिवार की महिलाओं ने समाज सुधार और महिलाओं में स्वाभिमान और राष्ट्र भाव जगाने के लिए भी वे आगे आईं। यही नहीं उन्होंने स्वदेशी अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। यह बात डॉ. शुभा साठे ने आर्टिस्ट कंबाइन दाल बाजार में त्या तिघी विषय पर आयोजित व्यायान में मुख्य वक्ता के रूप में कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद विवेक शेजवलकर ने की। मराठी साहित्य अकादमी भोपाल एवं राजकवि तांबे अयास मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपेंद्र शिरगांवकर थे।
कार्यक्रम में त्या तिघी उपन्यास की लेखिका डॉ. साठे ने कहा कि जब सावरकर भाइयों के पिता प्लेग में गुजर गए तो स्वातंत्रवीर विनायक दामोदर सावरकर के बड़े भाई गणेश की पत्नी यशोदा बाई यानी येसू वहिनी ने अपने गहने बेचकर छोटे भाइयों की पढ़ाई को जारी रखने में पति की सहायता की। वे उन दो छोटे बच्चों की मां बन गईं, जबकि उनकी दो बेटियां दस दिन की आयु में ही चल बसी थीं। उन्होंने ‘आत्मनिष्ठ युवती संघ’ नाम से एक अभियान चलाया, जिसमें क्रांतिकारियों की पत्नियां शामिल रहती थीं। वे स्वदेशी अपनाने के लिए महिलाओं को प्रेरित करती थीं।
इस अवसर पर अनिल ओक, विमल गुप्ता, यशवंत इंदापुरकर, विजय दीक्षित, लोकेंद्र पाराशर, अशोक आनंद, राजेश वाधवानी, नीरू सिंह ज्ञानी, दिनेश चाकणकर, डॉ. उमा कंपूवाले, निशिकांत सुरंगे, पंकज नाफडे आदि उपस्थित रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
MP Info News
Invalid RSS feed URL.
ब्रेकिंग न्यूज़
विज़िटर संख्या
अन्य ख़बरें
-
-
-
*हेमू कालानी जन्मोत्सव मिष्ठान वितरण कर बनाया* *
—03/23/2019 -









