सनातन धर्म मंडल के धर्म मंत्री सिंघल के समर्थन में उतरे मंडल के 55 सदस्य

Feb 11 2024

ग्वालियर। सनातन धर्म मंडल में धर्म मंत्री रहे रविन्द्र सिंघल चौबे को निलंबित किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। चौबे के समर्थन में मंडल के करीब 55 सदस्य उतर आए हैं। यह आंकड़ा इसलिए भी अहम माना जा रहा है कि मंडल के जानकारों के मुताबिक यदि 51 से अधिक सदस्य अगर कोई मांग करते हैं तो उस पर विचार करने सधारण सभा बुलानी होती है, हालांकि मंडल के अध्यक्ष ने इसे लेकर क ोई पुष्टि नहीं की है।
55 सदस्यों ने सनातन धर्म के प्रधानमंत्री और अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस बात की मांग की है कि चौबे एक सम्मानित सदस्य रहे हैं और उनके साथ जो तरीका अपनाया जा रहा है वह गलत है। उधर मंडल की मनमानी को लेकर धर्ममंत्री रविंद्र चौबे सिंहल न्यायालय की शरण में भी चले गए हैं।
पत्र में लिखा है चौबे कि मण्डल के एक पुराने, प्रतिष्ठित, कर्मठ एवं सेवाभावी सदस्य (आजीवन) जो कि विभिन्न पदों (निवर्तमान धर्ममंत्री) पर एवं कार्यकारिणी सदस्य भी रह चुके हैं। एवं 2019 के निर्वाचन में सर्वाधिक मतों से धर्ममंत्री के पद पर विजयी रहे थे, उनके साथ जो अन्याय एवं दुव्र्यवहार किया जा रहा है उसका हम सभी सदस्यगण विरोध करते हैं। निलंबन के पक्ष में आधा सैकड़ा से ज्यादा सदस्यों हस्ताक्षर करके मंडल के प्रधानमंत्री और अध्यक्ष को पत्र लिखा है, जिसमें निलंबन का पत्र शून्य घोषित कर सदस्यता बहाल करने की मांग की गई है।
पत्र में कहा, वह 2019 में ही नहीं बल्कि कई वर्षों से निरंतर निर्वाचन में भाग ले रहे हैं और निर्वाचित भी हो रहे है। इसके अलावा इस कार्यकाल से पहले के दोनों कोषाध्यक्ष गिर्राज अग्रवाल (वर्तमान कार्यकारिणी सदस्य) एवं राकेश बंसल (वर्तमान उपाध्यक्ष) ने लिखकर दिया है कि उनके कार्यकाल मे चौबे पर कोई ड्यूज नहीं निकल रहे थे, इसके अलावा 2017 की मण्डल की ऑडिट पत्रिका संलग्न है। जिसमें उनके नाम कोई ड्यूज नहीं है एवं मण्डल की सदस्यों की दोनों डायरक्ेट्री में वह आजीवन सदस्यों में दर्शित है। इसीलिए वर्तमान साक्ष्यों को देखते हुए जो कि स्वयं अब लगभग 15 वर्ष पुराने हो चुके हैं एवं तब से वह निरंतर आजीवन सदस्य के रूप में मण्डल को सेवाएं दे रहे हैं और उन्हें मण्डल के सदस्य पुरजोर समर्थन से समय-समय पर कार्यकारिणी एवं पद पर चुनकर भेज रहे है। अब यह संभव नहीं कि वह आपको 20 वर्ष या उससे भी पुराना साक्ष्य उपलध करा सकें कि अगर वह साधारण सदस्य थे भी तो आजीवन सदस्य कैसे बने?