जेयू के इतिहास विभाग के विद्यार्थियों ने शिक्षकों के साथ सैक्षणिक भ्रमण किया

Feb 10 2024

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के विद्यार्थियों ने शनिवार को अपने शिक्षकों के साथ सैक्षणिक भ्रमण हेतु सिहोनिया एवं ग्वालियर दुर्ग के पुरावशेषों का अवलोकन किया। सिहोनिया ग्वालियर के कच्छपघात राजवंश की आरम्भ में राजधानी थी। वज्रदामन द्वारा ग्वालियर पर अधिकार करने के बाद उन्होंने ग्वालियर को अपनी राजधानी बनाया। 
सिहोनिया का प्रसिद्ध ककनमठ मन्दिर कच्छपघात शासक कीर्तिराज द्वारा बनवाया गया है। जो अपनी विशालता, स्थापत्यकला, मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध है। यहां की अधिकांश मूर्तियों एवं स्थापत्य के अवशेष ग्वालियर के पुरातत्व संग्रहालय में संरक्षित है। जिसके विषय में विद्यार्थियों को शिक्षको ने बताया। 
सिहोनिया में कनकमठ के साथ-साथ माता का मंदिर, हनुमान मंदिर, जैन मंदिर एवं प्राचीन टीलों में दबे पुरावशेष का अवलोकन कर उस समय की संस्कृतियों को समझने का प्रयास किया। धरोहर पर रंग पोतकर एवम् विरूपित कर उसे नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जिसे देखकर उसके संरक्षण और लोगों को पुरावशेषों के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता का अनुभव किया।
सिहोनिया के बाद सभी लोग मितावली का चौसट योगिनी मंदिर देखने गए। पढ़ावली में मन्दिर व गढी स्थापत्य के बारे में जानकारी प्राप्त की। बटेश्वर में स्थित अनेकानेक मंदिरों के द्वारा उन्होंने मन्दिर के विभिन्न स्वरूप उनकी निर्माण शैली व विकाश के संदर्भ में ज्ञानार्जन किया। साथ ही पुनर्निर्माण की परक्रिया को भी उन्होंने वहा पर पुनर्निर्मित अनेक मंदिरों के माध्यम से समझने का प्रयास किया। 
ग्वालियर अंचल की उत्कृष्ट कलाकृतियां का अवलोकन कर क्षेत्रीय कला की विशेषताओं, विविधता तथा विकासक्रम के संदर्भ में विद्यार्थियों का दृष्टिकोण स्पष्ट हुआ। अपनी धरोहरों और उनके निर्माताओं के गौरवमय योगदान ने उन्हें मंत्रमुग्घ कर दिया। शैक्षणिक भ्रमण उनके ज्ञानवर्धन की दृष्टि से अत्यंत लाभदायक रहा। उन्होंने यह अनुभव किया कि पुस्तकीय ज्ञान के साथ साथ इतिहास को समझने के लिए पुरावशेषों को देखने से ही समझ विकसित हो सकती हैं।