ऊषा दीदी ने दिए तमामुक्त जीवन के मंत्र

Feb 08 2024

ग्वालियर। जब व्यक्ति की आध्यात्मिक क्षमता क्षीण हो जाती है तो उसके जीवन में तनाव बढऩे लगता है फिर उसका दिमाग भी उसी तरह रिएक्ट करने लगता है। छोटी बात पर तनाव हो जाना हमारी मानसिक कमजोरी की वजह है। यह बात ब्रह्माकुमारीज के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से आई अंतर्राष्ट्रीय प्रेरक वक्ता ऊषा दीदी ने चेंबर ऑफ कॉमर्स के सभागार में तनाव मुक्त जीवन विषय पर बोलते हुए व्यक्त कही।
ऊषा दीदी ने कहा कि तनाव का नकारात्मक प्रभाव हमारे मन के साथ हमारे तन पर भी पड़ता है जब हम गहरी अवसाद में चले जाते हैं तो नींद नहीं आती और हमें मनो चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है वह भी मेडिसिन के साथ साथ हमें नियमित रूप से मेडिटेशन करने की सलाह देते है। इससे अच्छा तो यह है कि हम तनाव ग्रस्त हो उससे पहले ही मेडिटेशन आरंभ कर दें। दिमाग पर जब दबाव बढ़ता है तो तनाव आना स्वाभाविक है और अपनी आंतरिक क्षमता बढ़ाने के रोज मेडिटेशन करें। जिस प्रकार हमें स्वस्थ शरीर के लिए स्वस्थ खुराक की जरूरत होती है उसी प्रकार से स्वस्थ मन के लिए भी अच्छे विचारों की खुराक की जरूरत होती है। 
जब हमारा मन विचारों से पुष्ट होता तो छोटी-छोटी बातें दिमाग को प्रभावित नहीं करेंगी। जब हम थोड़ी देर के लिए भी मेडिटेशन के लिए बैठते हैं तो व्यक्ति दिन भर के लिए असीम ऊर्जा से भर जाता है इसलिए अपने जीवन को संवारने के लिए आधा घंटा अवश्य निकले जिस तरह कुल्हाड़ी से लकड़ी काटने के लिए उसे लगातार धारदार बनाए रखना पड़ता है इसी तरह स्वयं को भी तनाव मुक्त रखने के लिए लगातार उसे मेडिटेशन और विचारों की खुराक देनी पड़ती है। तनाव की वजह से रिश्ते खराब हो रहे हैं जिन्हें बचाने के लिए बुद्धि की धार को तेज करना जरूरी है और वह आध्यात्मिक भोजन से ही तेज होगी।
जापान में मेडिटेशन करने वाले और नहीं करने वालों पर शोध हो चुका है मेडिटेशन करने वाले व्यक्ति तनाव मुक्त और अधिक क्षमता वाले होते हैं वहां की फैक्ट्री में भी काम शुरू करने से पहले मेडिटेशन कराया जाता है ताकि घर का तनाव कार्यक्षेत्र में न पहुंचे और घर आते समय भी मेडिटेशन कर जाता है ताकि काम का तनाव घर ना ले जाए तभी आप खुश रह पाएंगे।