शिव भक्ति से शारीरिक व्याधियों का नाश:स्वामी रामप्रसाद

Feb 08 2024

ग्वालियर। शिव कृपा के भंडार है। भगवान शिव ही एकमात्र ऐसे देव है जो हमारी किस्मत बदल सकते है और कोई देव नही बदल सकता। शिव कल्याण स्वरूप है और निरंतर अपने भक्तो का कल्याण करते है। जब किसी बीमारी का इलाज डॉक्टर भी नही कर पाता और बीमारी असाध्य लगती है तब भी अगर शिव आराधना की जाए तो बीमारियां ठीक हो जाती है। इसलिए लोग महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करवाते है। महामृत्युजय मंत्र से शारीरिक व्याधियां मिटती है और अकाल मृत्यु का भय भी खतम हो जाता है। यह बात रामद्वारा लक्ष्मीगंज में आयोजित द्वादश ज्योतिर्लिंग सत्संग में रामस्नेही संप्रदाय के वरिष्ठ संत रामप्रसाद महाराज ने उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
संतश्री ने बताया की शिव के जैसा कोई वैद्य नही है। जब गणेश जी का मस्तक कट गया था तो हाथी का मस्तक शिव ने ही जोड़ा था। विश्व का पहला ऑपरेशन शिव ने ही किया ऐसे ही रावण को भी मस्तक प्रदान किए।
द्वादश ज्योतिर्लिंग की कथा को आगे बढ़ाते हुए संतश्री ने नवम ज्योतिर्लिंग वैद्यनाथ की कथा श्रवण करवाई। संतश्री ने बताया की रावण शिव का परम भक्त था। रावण रोज अपना मस्तक काट कर शिव को चढ़ाता और शिव रोज उसका मस्तक जोड़ देते जिससे उसके दस मस्तक हो गए इसलिए उसका नाम दशानन हुआ। शिव ने वैद्य का काम किया इसलिए शिव का नाम वैद्यनाथ हुआ। रावण ने हिमालय में शिवलिंग बनाकर शिव आराधना की। रावण शिवलिंग को लंका में ले जाना चाहता था पर देवताओं की प्रार्थना पर भगवान गणेश ने परली क्षेत्र में शिवलिंग को विराजित करवा दिया। इसलिए परली में वैद्यनाथ विराजमान हुए। वैद्यनाथ भगवान के दर्शन और स्मरण से सभी शारीरिक व्याधियों का नाश होता है।
कथा के पश्चात आलोक नायक और ओमप्रकाश कुशवाह की तरफ से प्रसाद वितरण किया गया एवम समस्त भक्तो ने व्यासपीठ की आरती की।