हवन यज्ञ और भंडारे के साथ श्रीमद्भागवत कथा का समापन

Jan 24 2024

ग्वालियर। श्रीमदन मोहन मंदिर घासमंडी मुरार में चल रही श्री मद्भागवत कथा बुधवार को संपन्न हो गई। कथा के समापन के अवसर पर हवन यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया गया। भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहले हवन यज्ञ में आहुति डाली और फिर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य कमाया। कथा व्यास वल्लभाचार्य महाराज ने 7 दिन तक चली कथा में भक्तों को श्रीमद भागवत कथा की महिमा बताई। उन्होंने लोगों से भक्ति मार्ग से जुडऩे और सत्कर्म करने को कहा। उन्होंने कहा कि हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। 
कथावाचक श्री वल्लभाचार्य जी महाराज ने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। हर कथा या अनुष्ठान का तत्व सार होता है जो मन बुद्धि व चित्त को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान को लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। अवसर पर परीक्षित रामेश्वर दयाल, प्रेम कुमार, सुमित, गोपाल खंडेलवाल, शिवम, श्रीमती निधि, समाजसेवी प्रदीप गांगिल, मूलचंद, राजकुमार गुप्ता, अभय गांगिल, रामकुमार, रामप्रकाश, कमल, महेश गुप्ता सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।