भगवान की चिंता नहीं चिंतन करें:राजेश्वरी

Jan 20 2024

ग्वालियर। भगवान की प्राप्ति को लेकर हमें कभी चिंता नहीं करना चाहिए, बल्कि उनके स्वरूप का चिंतना करना चाहिए। भगवान के शरणागत होकर यदि हम ऐसा करेंगे तो भगवान की कृपा हमें जरूर मिलेगी। यह विचार डॉ राजेश्वरी ऋषीश्वर ने बीएसएफ कॉलोनी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान व्यक्त किए। इस मौके पर शिव-पार्वती की विवाह की सुंदर कथा हुई। 
राजेश्वरी ऋषीश्वर ने कहा कि हमें प्रह्लाद की तरह कीर्तन भक्ति में लीन होना चाहिए। यदि हम ऐसा कर पाए तो भगवान की भक्ति के दौरान कुछ और की सुध ही नहीं रहेगी और हमें अभीष्ट की प्राप्ति हो जाएगी। उन्होंने जीवन की अद्र्धशतक पूरा करने वालों को आगाह करते हुए कहा कि जब 50 के हो जाएं तो वनगमन(वंृदावन) कर लेना चाहिए, क्योंकि शरीर का पता नहीं ये कब साथ छोड़ दे। हम अपने भजन की पूरी तैयारी करके रखें ताकि मृत्यु का भय न रहे। उन्होंने कहा कि पत्नी यदि भगवान की पूजा नहीं कर पाती है तो यह काम अपने पति को सौंप दे, क्योंकि पति के पुण्य का फल बराबर पत्नी को मिलता है, क्योंकि  वह अद्र्धांगिनि है। उन्होंने कहा कि हमें मुक्ति का प्रयास नहीं करना चाहिए, बल्कि भक्ति में लीन रहना चाहिए। यदि हम भक्ति करेंगे तो मुक्ति तो मिल ही जाएगी। जब हम भक्ति में लीन होते हैं नारायण स्वयं हमारी गोद में खेलने लगते हैं।  
इस मौके पर कथा परीक्षत मिथेलस संजय शर्मा, कथा संयोजक प्रदीप ऋषीस्वर, रमेश शर्मा, रिटायर डीएसपी सुरेशबाबू शर्मा, राजेंद्र गौतम सहित सैकड़ों श्रद्धालु श्रोता मौजूद रहे।