जो उपदेश देते हैं, उसे पहले आचरण में उतारे:शास्त्री

Jan 20 2024

ग्वालियर। राजयोगी सद्गुरू महिपतिनाथ ढोलीबुआ महाराज के 200वें पुण्यतिथि महोत्सव के तहत ढोलीबुआ मठ में सुबह से शाम तक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सुबह रामनाम जप, दोपहर में श्रीमद्भागवत कथा और शाम को हरिनाम संकीर्तन आयोजित किया जा रहा है। इसी क्रम में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान पं रामस्वरूप शास्त्री ने कहा कि जो भगवान की शरण में आ जाते हैं, भगवान सदैव उनकी रक्षा करते हैं। इस मौैके पर सच्चिदानंद ढोलीबुआ महाराज प्रमुख रूप से मौजूद रहे। पं शास्त्री ने श्रीमद्भागवत कथा के गूढ रहस्यों को उजागर कतरे हुए कहा कि मंत्र को हम शब्द मानने की भूल न करें। मंत्र भगवान का साक्षात् रूप है। राम सिर्फ शब्द नहीं हैं, बल्कि राम का ही रूप है। नादब्रह्म हमेशा चलता रहता है। उन्होंने कहा कि हम जो भी गृहण करें, भगवान को भोग लगाकर ग्रहण करें। गुरू और साधु की कभी जाति न पूछे। उन्होंने कहा कि आदमी अंदर से जैसा होता है, वैसा ही देखता है। यदि इसका पता लगाना है तो उससे बातचीत शुरू करें, उसके भीतर है वो बाहर आ जाएगा। इसलिए व्यक्ति का नहीं भगवान का चिंतन करेें, तो वे जरूर कृपा करेंगे।