मन से कपट का परित्याग करने पर ही शांति: शास्त्री

Jan 08 2024

ग्वालियर। पारदी मोहल्ला बालाजी दरबार शिंदे की छावनी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में भागवताचार्य पं. घनश्याम शास्त्री महाराज ने कहाकि व्यक्ति को मन से कपट का परित्याग करना चाहिए। कभी-कभी सारी सब कुछ सही होती हैं लेकिन जाने-अनजाने में कभी-कभी हम लोगों से वैष्णव अपराध होता है। जिसके कारण भागवत कृपा नहीं होती और न ही भागवत दर्शन नहीं हो पाते। आज के समय में यह अपराध आसानी से हो जाता है।

श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिवस की शुरुआत में सभी श्रद्धालुओं भक्तगणों ने सवाल किया कि गया में पिंडदान करने के बाद श्राद्ध करना चाहिए या नहीं।
घनश्याम शास्त्री ने सवाल का उत्तर देकर श्रद्धालुओं की जिज्ञासा को शांत किया। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ एकादशी व्रत का महत्व भी साझा किया। उन्होंने कहा कि भगवान को पाने का सबसे प्रिय व्रत है एकादशी व्रत। एकादशी का व्रत सभी वैष्णवों को करना चाहिए। जो लोग भगवान को प्रसन्ना कर उन्हें पाना चाहते हैं उन्हें एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। उन्होंने भाईयों, पतियों एवं पिताओं के लिए भी खास संदेश दिया।उन्होंने कहा- शादी के बाद बहन को, बेटी को और भांजी को हमेशा देते रहना चाहिए क्योंकि आप जितना उनको देते रहेंगें।
अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो दर पे सुदामा गरीब आ गया है। सुंदर भजन के साथ भागवत कथा का समापन हुआ। अवसर पर बालाजी दरबार के महंत नरेंद्र मिश्रा पप्पी महाराज, परीक्षित श्रीमती रेखा पवन कुमार झा, हरिओम शर्मा, देवेंद्र प्रजापति, सिंपी पंडित, विवेक तिवारी उपस्थित रहें।