भागवत कथा के श्रवण मात्र से जीवों का कल्याण संभव: भागवताचार्य शास्त्री

Jan 03 2024

ग्वालियर। शिन्दे की छावनी पारदी मोहल्ला बालाजी दरबार में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन भागवताचार्य पं. घनश्याम शास्त्री महाराज ने कहा कि शास्त्र, संस्कार एवं सत्संग से जीवों का उद्धार व कल्याण होता है। जीव अपने माता के गर्भ में संकल्प के साथ स्वीकार करता है कि धरती पर जाने के बाद सर्व शक्तिमान परमात्मा को कभी नहीं भूलेंगे। लेकिन इस संसारिक माया में उलझकर अपने द्वारा किए गए एक करार नामा और संकल्प को भूल जाता है।
घनश्याम शास्त्री महाराज ने कहा कि वाल्मिकी जैसे कुख्यात अपराधी प्रवृत्ति के जीव जब प्रतिष्ठित पद को प्राप्त कर सकता हैं, तो इस संसार के हर लोग भी भगवत भजन व सत्संग के जरिए परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। इन्होनें विभिन्न उदाहरणों के द्वारा जगत को जगदीश्वर की प्रतीति व अनुभूति का साधन बताया। संसार की सारी वस्तुएं अंत में यहीं छूट जाती है और केवल सत्कर्म, भजन अथवा धर्म ही साथ जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में धर्मपालन में प्रमाद नहीं करना चाहिए। धर्म के विभिन्न रूपों की व्याख्या करते हुए आचार्य ने कुलधर्म, वर्णधर्म, आश्रम धर्म, दान धर्म, मोक्ष धर्म, स्त्री धर्म एवं भगवद्धर्म पर विस्तार से प्रकाश डाला। अंत में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही जीवों का कल्याण संभव है। इस अवसर पर बालाजी दरबार के महंत पप्पी महाराज और श्रीमती रेखा पवन कुमार झा उपस्थित रहे अंत में आरती की गई।