गणाचार्यश्री के जन्म जयंती महोत्सव का आगाज शोभायात्रा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ

Dec 30 2023

ग्वालियर। गाणाचार्यश्री पुष्पदंत सागर महाराज की 70वीं जन्मजयंती पर क्रांतिवीर मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज के सानिध्य में 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक तीन दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ नई सडक़ स्थित चंपाबागा धर्मशाला में जैन ध्वजारोहण एवं दीप प्रज्वलित, विराट धर्मसभा व अन्य सांस्कृतिक कार्यकमों के साथ हुआ। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज के 70वें जन्मजयंती महोत्सव का आगाज आज समन्वयक जैन मिलन ग्वालियर की ओर से मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज सानिध्य में विशाल भव्य मंगल कलश शोभायात्रा के साथ शुरू हुई। यह शोभायात्रा दाना ओली स्थित दिगंबर जैन वरैया मंदिर से शुरू होकर नईं सडक़ स्थित कार्यक्रम स्थल चंपाबाग धर्मशाला पहुंची। शोभायात्रा में सबसे आगे युवा पचरंगी जैन ध्वजा लेकर चल रहे थे। वही महिलाएं मंगल कलश सिर पर रखकर व मंगल गीत गाकर चल रही थी। वही भक्ति भजनों के साथ बालिकाएं और महिलाएं डांडिया गरबा खेलती हुई चल रही थी। शोभायात्रा कार्यकम स्थल पर पहुँचने पर मुनिश्री ने मंत्रो से चारो दिशाएं में महिलाओ के कलश के जल से स्वाति की आकृतियां बनकर भूमि शुध्दि आदि क्रिया संपन्न कराई।
जिस तरह हीरे की कीमत जौहरी जानता है, वैसे ही समय की कीमत महापुरूष ही कर पाता है-मुनिश्री 
क्रांतिवीर मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने चंपाबाग धर्मशाला में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिस तरह हीरे की कीमत जौहरी ही जानता है, उसी तरह समय की कीमत कोई महापुरूष ही कर पाता है। समय का तिरस्कार, मानव जीवन की प्रगति का तिरस्कार है। जो समय के महत्व को नहीं जानता, वह जीवन में महत्वपूर्ण कार्यों का संपादन नहीं कर सकता। समय के सदुपयोग से व्यक्ति महान बन सकता है। एक क्षण भी बेकार न जाने देना और उसका सदुपयोग करना प्रगति का लक्षण है। जो अपने सभी कार्य समय पर करते हैं, उनके शरीर में स्फूर्ति, तंदुरूस्ती और प्रसन्नता रहती है। वे बड़े से बड़े कार्य को थोड़े से समय में कर सकते हैं। धर्म कार्य में तो बिलंब कतई न करें।