ग्वालियर में प्रथम बार 70वीं जयंती एवं अमृत महोत्सव पर कार्यक्रम होंगे
Dec 27 2023
ग्वालियर। गाणाचार्य पुष्पदंत सागर महाराज की 70वीं जयंती पर क्रांतिवीर मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज के पावन सानिध्य में आयोजक दिगंबर जैन जागरण युवा मंच ग्रेटर ग्वालियर एवं सकल दिगंबर जैन समाज ग्वालियर के सयुक्त तत्वाधान में 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक तीन दिवसीय कार्यक्रम नई सडक़ स्थित चंपाबागा धर्मशाला में आयोजित किया जाएगा। जिसकी तैयारियों को लेकर 28 दिसंबर 23 को प्रात 9 बजे से चंपाबाग धर्मशाला में मुनिश्री के सानिध्य में सकल जैन समाज के गणमान्य एवं समस्त संस्थाओं की बैठक आयोजित की गई है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ 30 दिसंबर प्रात: 8:30 बजे विराट धर्म सभा एवं दोपहर 2 बजे 1008 महिलाओं द्वारा विराट कलशयात्रा (इंदरगंज चौराहे से शुरू होकर कार्यक्रम स्थल चंपाबाग धर्मशाला पहुंचने पर ध्वजारोहण के साथ होगा। वही शाम 6 बजे आनंद यात्रा गुरु भक्ति एवं विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम रात्रि 8 बजे से होगे। वही 31 दिसंबर प्रात: 8:30 बजे विराट धर्म सभा के साथ शाम 6 बजे आनंद यात्रा गुरु भक्ति रात्रि 8 बजे से 12 बजे तक भजन संध्या संपन्न पर रात्रि 12 बजे 1008 दीपों से महाआरती एवं मुनिश्री के द्वारा परिवार की सुख शांति समृद्धि के लिए मौन आशीर्वाद मिलेगा।
वही 1 जनवरी 2024 में प्रात 8 बजे जिन बिम्ब प्रतिमाओं की 108 पालकी एवं रथयात्रा शोभायात्रा निकाली जाएगी एवं कार्यकम स्थल पहुंचने पर 108 जिनबिम्ब प्रतिमाओं का मस्तिष्काभिषेक होगा। वही शाम 6 बजे आनंद यात्रा गुरु भक्ति आरती होगी।
अपने दोषों को देखकर उन्हें दूर करता है वह इंसान आत्म साधक की श्रेणी में आता है-प्रतीक सागर
क्रांतिवीर मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने नईं सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला में धर्मसभा में संबोधित करते हुए कहा कि मानव का स्वभाव रहा है कि वह मन की वक्रता वश दूसरों के राई समान दोष को भी दूरबीन से देखता है और अपने दोषों को कभी देखना ही नहीं चाहता है। जो दूसरों के बजाय अपने दोषों को देखकर उन्हें दूर करता है वह इंसान आत्म साधक की श्रेणी में पहुंच जाता है। इसलिए दूसरों के दोषों को देखने की वजाए अपने दोषों को देखकर उन्हें दूर करने की कोशिश करो। अपने दोष देखने के लिए अपने मन की ओर झांकना होगा। मुनिश्री ने कहा है कि निश्चय को पकड़ो। निश्चय से ही आपका कल्याण संभव है, जो अपना कल्याण चाहता है उसे कभी दूसरों में कमियां नहीं देखनी चाहिए। दूसरों की कमियां देखने में हम अपनी ईमानदारी को खो बैठते हैं। जैसे पानी और अग्नि के संबंध से पानी गर्म हो जाता है, वैसे ही आत्मा और कषाय का निमित्त संबंध है। उन्होंने कहा युवा को उल्टा कर दें तो वायु हो जाते हैं और वायु अच्छे से अच्छे को उड़ा देती है। इसी प्रकार अगर युवा मन में ठान ले तो बड़े से बड़े कार्य कर सकते हैं।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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