संतों का सम्मान भारतीय संस्कृति का आधार है: मुनिश्री प्रतीक सागर

Dec 21 2023

ग्वालियर। संत जहां से चल देते हैं वहां सुना सुना हो जाता है और जहां पहुंच जाते हैं वहां सोना सोना हो जाता है। मैं 14 वर्ष बाद अपनों से मिलने के लिए ग्वालियर आया हूं। संतों का सम्मान भारतीय संस्कृति का सम्मान का आधार है जिसे भक्तों के द्वारा संपूर्ण भक्ति और संवेदनाओं के साथ किया जाता है। गुणीजनो को देखकर जो हर्षित और आनंदित होता है वह एक दिन दुनिया के सर्वोच्च पद को प्राप्त करता है। यह विचार क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने गुरुवार को नई सडक़ स्थित चांपाबागा धर्म शाला में दिगंबर जैन युवा जागरण मंच की ओर से भव्य मंगल प्रवेश के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
मुनिश्री ने आगे कहा कि मैं ग्वालियर वालों को कुछ सिखाऊंगा नहीं अभी तो उन्हें जैनत्व से परिचय करा कर जैनम जयति शासन का स्वर गूंजे मान करना चाहता हूं। दूसरों की पहचान से अपनी पहचान न देकर अपने चरित्र का प्रमाण देकर स्वयं की पहचान बनाएं। जैन धर्म सागर की तरह विशाल है जिसमें सभी समाहित हो जाते हैं उसे हमें कुएं का पानी बनाकर कैद करने की जरूरत नहीं है। जल जब भगवान के मस्तक पर चढ़ जाता है तो गांधोधक बन जाता है इस तरह से भक्त जब भक्ति करते हुए गुरु के प्रति समर्पित हो जाता है तो एक दिन गुरु उसे भगवान का स्वरूप प्रदान कर देते हैं। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया मुनिश्री के प्रवचन रोजाना प्रात: 9 बजे से चंपाबाग धर्मशाला में होगे। दोपहर 3 बजे शंका समाधान, शाम 6 बजे से आनंद यात्रा तनाव मुक्ति का अभिनव प्रयोग का आयोजन होगा।