सनातन धर्म मण्डल संस्था ने द्वेवश भावना से सदस्यता समाप्त की :रविंद्र सिंहल

Dec 21 2023

ग्वालियर। सनातन धर्म मण्डल के धर्ममंत्री रविन्द्र सिंहल (चौबे) ने गुरूवार को पत्राकारों से चर्चा करते हुए कहा कि नियम विरुद्ध सनातन धर्म मण्डल संस्था ने सदस्यता समाप्त की है। जबकि संस्था की वर्तमान कार्यकारिणी पहले ही समाप्त हो चुकी है। आधारहीन तथ्यों के आधार पर उनकी सदस्यता समाप्त करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है। इसीलिए अब न्याय के लिए न्यायालय की शरण लेंगे। साथ ही संस्था की आर्थिक अनियमितताओं की जांच के लिए आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो का दरवाजा खटखटाएंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रविन्द्र सिंहल ने खुलासा किया कि वे सनातन धर्म मण्डल की बैठकों में पदाधिकारियों के कदाचारण एवं नियम विरुद्ध कार्यशैली के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। इसलिए उनसे छुटकारा पाने के लिए द्वेवश भावना से उन्हें पदच्युत करने का आधारहीन कारण तैयार किया गया है। उन पर कथित तौर पर सन 1994 से 2007 की अवधि की पुरानी रिकवरी निकाल दी गई। जबकि मेरे द्वारा सनातन धर्म मण्डल संस्था के चुनावों में कई बार भागीदारी की है, मतदान भी किया है, और कई पदों पर चुनाव लड़े गए और मैं उन चुनावों में जीता भी। जबकि नियमानुसार संस्था के किसी भी सदस्य को चुनाव लडऩे का अधिकार तभी मिलता है। तब  उसका नोड्यूज हो चुका होता है। वे नोड्यूज क्लीयर होने के बाद ही चुनाव लड़ते रहे हैं। उधर सनातन धर्म मण्डल संस्था द्वारा मेरे पर साधारण सदस्यता शुल्क एवं विलंब शुल्क के 29,050 रुपए बकाया दिखाकर सदस्यता समाप्त कर दी गई है। 
जबकि वास्तविकता यह है कि सनातन धर्म मण्डल के दो निवर्तमान कोषाध्यक्ष राकेश बंसल एवं गिर्राज अग्रवाल ने उन्हें लिखित में यह जानकारी दी है कि उनके कार्यकाल का उन पर कोई बकाया अथवा रिकवरी नहीं है। इन दोनों निवर्तमान कोषाध्यक्षों के इस बाबत पत्र उन्हें प्राप्त हो चुके हैं। फिर किस आधार पर संस्था के वर्तमान में सर्वेसर्वा बने बैठे पदाधिकारी मेरे ऊपर लेनदारी होने की बात कह रहे हैं। इसलिए संस्था के सर्वेसर्वा पदाधिकारियों का यह आरोप स्वत: ही निर्मूल एवं व्यक्तिगत द्वेष आधारित सिद्ध हो जाता है। 
संस्था के किसी भी सदस्य को इस तरह पद से हटाने व सदस्यता समाप्त करने का पदाधिकारियों को संवैधानिक अधिकार ही नहीं है। क्योंकि कोई भी संस्था नवीन सदस्यों को तो जोड़ सकती है लेकिन किसी सदस्य को हटाने के लिए विधिवत प्रक्रिया का पालन करना होता है, इस प्रक्रिया के तहत प्रथमत: कार्यकारिणी में निर्णय लेना होता है, फिर साधारण सभा में प्रस्ताव पारित कराया जाता है लेकिन उनके संबंध में इस प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया गया। वहीं मेरे द्वारा सूचना के अधिकार के तहत आरटीआई दाखिल कर सनातन धर्म मण्डल से जानकारी भी मांगी लेकिन उन्हें कोई उत्तर नहीं दिया गया। 
रविन्द्र सिंहल ने कहा कि वे अब न्याय प्राप्ति के लिए न्यायालय की शरण लेंगे और संस्था की आर्थिक अनियमितताओं की जांच के लिए आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
पत्रकारवार्ता में पूर्व संयुक्त अध्यक्ष नरेंद्र सिंघल, शैलेंद्र बंसल, रामबाबू अग्रवाल, सुरेश मित्तल, वीरेंद्र जैन भी मौजूद रहे।