वैश्विक पुनरोत्थान के दौर में संस्कृत सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाषा: डा खैमरिया

Dec 17 2023

ग्वालियर। विश्व बंधुत्व एवम वैश्विक विकास की बात की जाए तो हम देखते हैं कि संस्कृत भाषा में निवद्ध संपूर्ण साहित्य वेद, उपनिषद, आर्ष काव्य अथवा लौकिक संस्कृत साहित्य  मानव कल्याण तथा जगत कल्याण की ही बात कहता है। संस्कृत भाषा को लेकर वैश्विक स्तर पर सीखने की होड़ लगी हुई है। संस्कृत भारती,एवम राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के विभिन्न प्रयोगों द्वारा संचालित कार्यक्रमों एवम आयोजनों के माध्यम से आज संस्कृत भारत के अतिरिक्त अनेक देशों में वागव्यवहार में है।
उक्त उद्गार एमएलबी कॉलेज में आयोजित अनौपचारिक संस्कृत अध्ययन केंद्र के उद्घाटन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित  प्राध्यापक एवम विभागाध्यक्ष संस्कृत चेयरमैन संस्कृत जीवाजी विश्वविद्यालय तथा संस्कृत भारती के प्रांत संपर्क गण सदस्य डा मनीष खैमरिया ने दिए। श्री खैमरिया ने कहा आपने मधुर एवम सरल रूप में प्रयोग की जाने वाली भाषा संस्कृत को लेकर जन सामान्य में उत्साह है।अब संस्कृत अपने पूर्वकाल के समान ही जनभाषा स्वरूप में भी दृष्टिगोचर होने लगी है। इस अवसर पर विद्याभारती से पधारे मनोज तिवारी ने मुख्य अतिथि के रूप में अपना उद्वोधन दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एमएलबी कॉलेज के प्राचार्य डॉ पुरुषोत्तम गौतम ने की। इस अवसर पर 40  विद्यार्थियों को पुस्तकें वितरित की गईं। 
कार्यक्रम में डा नरोत्तम, अशोकजी, डीएस राणा, टोटन माइती, गरिमा खंडेलवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवम छात्र-छात्राऐं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन दीप्ति दीक्षित ने किया।