पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं,जो भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है: घनश्याम शास्त्री

Dec 15 2023

ग्वालियर। नई सडक़ स्थित पहाडाय वाली माता मंदिर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण-रुकमणी विवाह धूमधाम से मनाया गया। भागवताचार्य पं.घनश्याम शास्त्री महाराज ने रासपंच अध्याय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। महारास, गोपी गीत और रुक्मणि विवाह की कथा सुनाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया।
 कथा व्यास घनश्याम शास्त्री ने कहा कि रास का अर्थ आनन्द का समूह महारास कोई नर नारी का मिलन नही है ये तो आत्मा और परमात्मा का मिलन हैं। आत्मा और परमात्मा जहाँ मिलते हैं वही महारास है।  उन्होंने कहा कि संसार में आने पर जीव भूल बैठा है कि उसका जन्म किस उद्देश्य को लेकर हुआ है। भक्तों की स्थिति ऐसी है जैसे कीचड़ में कमल रहता है। उसी तरह वैष्णव जन इस संसार के भौतिक लोगों के साथ रहते हुए भी प्रभाव से परे रहते हैं। भक्त संकट में हमेशा खुश रहते हैं। वह कभी निराश नहीं होते। भगवान भी अपने भक्त की परीक्षा लेते हैं। कष्ट होने पर भगवान को ज्यादा से ज्यादा याद किया जाता है।  
इस अवसर पर परीक्षित श्रीमति विनीता एनसी चतुर्वेदी, वंदना अखिलेस, श्याम श्रीवास्तव, संतोष गर्ग व पहाड़ बाली माता मंदिर पुजारी घनश्यामदास शर्मा, सूर्य प्रकाश शर्मा आदि सदस्य उपस्थित रहे।