बंदियों को भी गरिमामय जीवन जीने का अधिकार:दीपक शर्मा

Dec 11 2023

ग्वालियर। जेल में निरुद्ध बंदियों को भी गरिमामय जीवन जीने का अधिकार है। मानव अधिकारों में बंदियों के प्रति व्यवहार में उनकी जाति, संप्रदाय, लिंग, भाषा, धर्म या किसी देश या राष्ट्र की नागरिकता के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। बंदियों को सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों में सहभागीता करने का अधिकार है। साथ ही बंदियों को नि:शुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने, मुलाकात का अधिकार, मारपीट एवं प्रताडऩा के खिलाफ शिकायत करने का अधिकार, व्यक्तिगत सुनवाई का अधिकार, धर्म पालन का अधिकार, उपचार का अधिकार प्रदान किया गया है। यह बात प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ग्वालियर पीसी गुप्ता के निर्देशन एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गालिब रसूल के मार्गदर्शन में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर केन्द्रीय कारागार ग्वालियर में सभी के लिए स्वतंत्रता, समानता और न्याय थीम पर आयोजित विधिक जागरूकता कार्यक्रम के दौरान जिला विधिक सहायता अधिकारी दीपक शर्मा द्वारा व्यक्त किए गये।
कार्यक्रम में डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल ने बताया कि बंदियों को न्यायालयीन प्रक्रिया की जानकारी नहीं होती है, जिसके कारण न्यायलयीन प्रक्रिया के दौरान कई प्रक्रमों पर अपने अधिकारों से वंचित हो जाते हैं। इसलिए अपने प्रकरणों के विचारण के दौरान न्यायालयीन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण के संबंध में विस्तृत जानकारी होना जरूरी है। ताकि वास्तव में ऐसे बंदियों को सही न्याय मिल सकें। अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस मनाने का उद्देश्यऔर भूमिका पर प्रकाश डालते हुये कहा, कि जन्म के साथ ही प्रत्येक व्यक्ति को मानव अधिकार उपलब्ध हो जाते है।