उपाध्यायश्री विहसंत सागर का हुआ मुरार में प्रवेश, दो संतो का हुआ वात्सल्य मिलन

Dec 06 2023

ग्वालियर। बुधवार को धर्मनगरी मुरार में मेडिटेशन गुरु उपाध्यायश्री विहसंत सागर महाराज, मुनिश्री विश्व सौम्या सागर महाराज और क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर का वात्सल्य संत मिलन हुआ। मुरार में उपाध्यायश्री विहसंत सागर महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश होते ही गुरुदेव के जयकारों से गूंज उठे। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि उपाध्यायश्री विहसंत सागर महाराज ससंघ का सुबह ठाठीपुर से मुरार धर्मनगरी में मंगल प्रवेश हुआ तो क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज स्वयं अगवानी करने के लिए सात नंबर चौराहे पहुंचे। यहां दोनों उपाध्यायश्री विहसंत सागर, मुनिश्री सौम्या सागर एवं मुनि प्रतीक सागर महाराज का वात्सल्य मिलन हुआ। तदुपरांत ढ़ोल-नगाड़ों के साथ गुरुभक्तों ने जगह जगह पाद प्रक्षालन एवं आरती उतारकर उपाध्यायश्री विहसंत सागर महाराज और क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज का भव्य स्वागत किया। दोनो जैन संतश्री श्री दिगंबर जैन बड़ा पंचायती मंदिर पहुंचे। पूर्व विधायक मुन्नलाला गोयल ने अपने निवास पर उपाध्यायश्री विहसंत सागर महाराज ससंघ के चरणों का पद प्रक्षालन कर श्रीफल भेंटकर मंगल आशिवाद लिया।
धार्मिक कार्यों से ही आपके जीवन में पुण्य की वृद्धि होती है : उपाध्यायश्री विहसंत
उपाध्यायश्री विहसंत सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते कहा कि भाग्य से अधिक किसी को कुछ नहीं मिलता। पुण्य होगा तो अंजान व्यक्ति भी आकर आपकी सेवा व्यवस्था में जुट जाते हैं। जंगल में भी मंगल हो जाता है। लेकिन जब पुण्य नहीं होता तो मंगल में भी जंगल जैसा प्रतिकूल वातावरण नजर आने लगता है। कुछ काम ऐसे होते हैं जो बनाए नहीं बल्कि स्वयं ही बन जाते हैं। इसे कहते हैं भाग्य। भाग्य, पुण्य आता कहां से है तो अपनी सम्यक् साधना, चर्या, क्रिया, धार्मिक कार्यों से ही आपके जीवन में पुण्य की वृद्धि होती है। इसलिए हमें निरंतर संसार के राग को छोडक़र धर्मानुराग की ओर कदम बढ़ाना चाहिए। क्योंकि जो जैसा करता है उसे वैसा ही भोगना पड़ता है। आज 7 दिसंबर को फूलबाग मैदान में पंचकल्याणक मुख्य वेदी का शिलान्यास कार्यक्रम दोपहर 12:30 बजे से होगा।
मन के निर्मल होते ही भगवान स्वयं चलकर तुम्हारे दरवाजे पर आ जाएंगे: मुनिश्री प्रतीक सागर
क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहाकी मन की एकाग्रता के पहले मन की निर्मलता जरूरी है मन के निर्मल होते ही भगवान स्वयं चलकर तुम्हारे दरवाजे पर आ जाएंगे। मीरा,सबरी, चंदन वाला, राजा श्रेयांश आदि का मन निर्मल हुआ तो राम, कृष्णा, महावीर स्वामी, आदिनाथ भगवान स्वयं चलकर पहुंचे। महापुरुषों का अनुसरण करें उनकी केवल प्रशंसा नहीं करें उनके बताए हुए मार्ग पर चलकर उनके जैसा बनने का पुरुषार्थ करना चाहिए इस देश को आचरण के आचार्य की जरूरत है। मगर आज देश में बातों के बादशाह अधिक है।
त्रिदिवसीय अखंड णमोकार महामंत्र पाठ का हुआ समापन
श्रमण संस्कृति परमार्थ संस्थान ग्रेटर ग्वालियर के तत्वावधान में त्रिदिवसीय अखंड णमोकार महामंत्र पाठ का समापन आज दानाओली स्थित दिग.जैन वरैया पाश्र्वनाथ मंदिर जैन भवन में किया गया। जाप्यनुष्ठान के समापन पर पंचपरमेष्ठी महामंडल विधान के साथ विश्वशांति महायज्ञ एवं वरिष्ठजनों का सम्मान समारोह के साथ किया गया। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि त्रिदिवसीय णमोकार महामंत्र अखंड पाठ के समापन पर पंचपरमेष्ठी महामंडल विधान के प्रारंभ में पं भरत जैन बैरागी ने मंत्र उच्चरणों के साथ इंद्रो जयकारो के साथ सामूहिक रूप से भगवान मुनिसुव्रतनाथ का कलशों से अभिषेक किया। भगवान की दीपक से महाआरती उतारी गई।