भैरव का अभिषेककर खीर, मालपुए और मंगोड़ों का लगा भोग

Dec 05 2023

ग्वालियर। शहर भैरव मंदिरों में मंगलवार को भैरव अष्ठमी के अवसर पर मंगलवार सुबह से ही श्रद्धालू भगवान भैरवनाथ के दर्शन करने पहुंचे। श्रद्धालूओं ने भगवान भैरवनाथ की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की। भैरव अष्ठमी के अवसर पर मंगलवार को शहर भर में भैरव मंदिरों पर विशेष पूजा अर्चना के साथ प्रसादी वितरण का आयोजन किया गया है। 
मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी मतलब मंगलवार को भैरव जयंती मनाई गई। इसे कालाष्टमी भी कहते है। भैरव अष्टमी को लेकर मंदिरों में सुबह से भैरव का अभिषेक करने भक्तों की भीड़ उमड़ी। भक्तों ने अभिषेक कर भैरव को खीर, मालपुए, मंगोड़ों का भोग लगाया या है। नई सडक़ स्थित भैरव मंदिर में 125 किलो केसर वाले दूध का भोग लगाकर प्रसादि वितरण किया गया है। यह इकलौता मंदिर है जहां भैरव की तीन मुख हैं। यह मंदिर 121 साल पुराना बताया जाता है।
मंगलवार को भैरव अष्टमी होने के चलते श्रृंगार के बाद मंदिरों के पट खोले गए। इसके बाद भक्तों को प्रसादी वितरित की गई। वहीं सराफा बाजार के बच्छराज का बाड़ा स्थित 120 वर्ष से भी अधिक प्राचीन भैरव मंदिर पर मंत्रोच्चार के साथ भैरव महाराज का महाभिषेक हुआ। अभिषेक के बाद विधि-विधान से हवन हुआ। यह मंदिर देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां पर भैरव जी की तीन प्रतिमा स्थापित है। मंदिर को आकर्षक लाइटिंग से सजाया गया है।
नया बजार स्थित श्रीकाल भैरव मंदिर मैं बाबा को अष्टमी पर मंदिरा पान कराया गया। यह ग्वालियर चंबल संभाग का एकमात्र मंदिर है जहां बाबा को मदिरा का भोग लगाया जाता है। साथ ही श्रीकाल भैरव प्राकट्योत्सव पर बाबा का अभिषेक फूलबंगला छप्पन भोग सजाया गया है। मंगलवार को शाम 6 बजे से विशाल भंडारा आयोजित किया जाएगा।
काल भैरव दयालु कल्याण करने वाले और अतिशीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता है इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा करने से जीवन की बाधाओं और परेशानियों से छुटकारा मिलता है। साथ ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 
भगवान भैरव का वाहन श्वान है। इस दिन भगवान भैरव की पूजा करने के साथ ही काले श्वान को दूध, दही पिलाने का विधान है। इससे काल भैरव के साथ शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है। जीवन में सफलता मिलती है।