आयुर्वेद ग्रंथ का अध्ययन कर शरीर को निरोगी रखें:महंत रामसेवक दास

Nov 10 2023

ग्वालियर। सर्वधर्म एकता मंच के तत्वावधान में शुक्रवार को सिद्धपीठ गंगादास की बड़ी शाला में भगवान धन्वंतरि का प्रकटोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महंत रामसेवक दास महाराज थे। अध्यक्षता परशुराम सर्व ब्राह्मण संघ की राष्ट्रीय महामंत्री मधु भार्गव ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्था के संरक्षक कपिल भार्गव थे। प्रारंभ में अतिथियों ने भगवान धन्वंतरि की तस्वीर पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलन किया। स्वागत भाषण अध्यक्ष एड. आदित्य भार्गव दिया।
कार्यक्रम में महंत रामसेवक दास महाराज ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए जीवनशैली सही रखें। एक हाथ में अमृत कलश है, जो संदेश देता है कि जल ही जीवन है, जल की महत्ता समझें और शरीर की आवश्यकता के अनुसार उसका सेवन करें। दूसरी भुजा में गिलोय औषधि है, जिससे संदेश मिलता है कि हर जड़ी-बूटी का अपना महत्व है, उनका सेवन करने के साथ सम्मान भी दें। तीसरी भुजा में शंख धारण किया हुआ है, जो हमें पवित्रता का संदेश देता है। जिस तरह पूजा घर में शंख का उपयोग होता है जिसकी ध्वनि मात्र से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शंख की तरह ही हमारा शरीर पवित्र होना चाहिए। चौथी भुजा में आयुर्वेद ग्रंथ के माध्यम से संदेश देते हैं कि हर बीमारी का इलाज आयुर्वेद में हैं। 
आयुर्वेद ग्रंथ का अध्ययन करके शरीर को निरोगी रखें। मधु भार्गव ने कहा कि भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद चिकित्सा के जनक है। उन्होंने ही बीमारियों से शरीर को बचाने के लिए आयुर्वेद चिकित्सा पद्दति का उद्गम किया। कपिल भार्गव ने बताया कि कहा जाता है कि भगवान धन्वंतरि ने प्रकृति में पैदा होने वाली जड़ी बूटियों व पेड़ पौधों के फायदे के बारे में मानव को बताया। पेड़ पौधों से किन किन रोगों का उपचार किया जा सकता है। इसके बारे में बताया गया कि किस-किस जड़ी बूटी से कौन-कौन से रोगों को हराया जा सकता है।
महंत रामसेवक दास महाराज ने बताया कि देवता और राक्षसों ने जब समुद्र मंथन किया था, तब भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर अवतरित हुए थे। उनका अवतरण कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को हुआ था, इसलिए धनतेरस पर उनकी पूजा की जाती है। 
अंत में समिति की मधु भार्गव, कपिल भार्गव एवं एड. आदित्य भार्गव ने आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. प्रताप शंकर भार्गव, डॉ. बृजेंद्र श्रीवास्तव, डॉ. दिवाकर शर्मा, डॉ. दीपक सिंह तोमर, डॉ. प्रभाशंकर कौरव, डॉ. नरेश बघेल, डॉ. पीएस राजोरिया, डॉ. संजीव धाकड़, डॉ. मनीष चंदेल को सम्मान दिया।