मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए धन बल व अपराधों का होता है प्रयोग:डॉ. सिंह
Nov 02 2023
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर काले धन की खपत देखने में आ रही है। कुछ प्रत्याशी साड़ी बांट रहे हैं तो कुछ धन बांट कर प्रत्याशियों को अपने पक्ष में कर रहे हैं। लेकिन वोटरों को अपने एक मत का महत्व समझना है। चुनाव में कालेधन पर रोक के लिए सरकार के साथ इलेक्शन वॉच व एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) भी सक्रिय है। यह बात गुरूवार को एडीआर के कोर्डिनेटर डॉ. संजय सिंह ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही।
डॉ. सिंह ने कहा कि पिछले 2018 विधानसभा के चुनाव में मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चम्बल सम्भाग में सबसे कम मतदान हुआ था। इसको ध्यान में रखते हुए इन विधानसभा क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत बढऩे हेतु एडीआर के द्वारा काम किया गया है। उनकी प्रतिनिधित्व का विश्लेषण की रिपोर्ट जारी की गयी है। 2018 के विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में 120 राजनैतिक दलों और निर्दलियों ने चुनाव लड़ा था जो 2013 विधानसभा के सापेक्ष 82 प्रतिशत की वृद्धि है। इससे प्रतीत होता है कि चुनाव में वोट काटने के लिए धनबली और बाहुबली प्रत्याशियों से आर्थिक लाभ लेकर चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे प्रत्याशियों के चुनाव लडऩे से एक तरफ जहाँ वैलेट पेपर का आकार बड़ा हो जाता है वही दूसरी तरफ मतदाता को भी मतदान के दौरान कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
ग्वालियर, चंबल, बुंदेलखण्ड और विंध्य विधानसभाओं में मतदाता जागरूकता अभियान के दौरान देखने में आया है कि उम्मीदवार मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए तमाम तरह के प्रलोभन और लालच दे रहे हैं। इसके लिए प्रत्याशियों ने बाकायदा ठेकेदारों को जिम्मेदारी सौँपी है जो पंचायत में जाकर सरपंचों एवं प्रभावशाली लोगों को अपने पक्ष में करने के उपाय कर रहे हैं। ताकि पूरे गांव के वोट उनके पक्ष में पड़े। ऐसे कम मतदान प्रतिशत वाले विधानसभा क्षेत्रों में एडीआर के द्वारा विशेष मतदाता जागरूकता अभियान चलाया जायेगा।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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