बुद्धिबल, बाहुबल व आत्मबल से चरित्र और व्यक्तित्व को निखारा जा सकता है: महेश गायकवाड़

Oct 26 2023

ग्वालियर। सकारात्मक चेतना व्यक्ति के कार्यों को सही मार्ग पर ले जाती है। भय मुक्त जीवन के लिए चरित्र को जीवट बना कर लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकती है। बुद्धिबल, बाहुबल व आत्मबल से अपने चरित्र और व्यक्तित्व को निखारा जा सकता है। यह बात माधव महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा स्वतंत्रता के 77वें वर्ष में रामकृष्ण मिशन आश्रम की एक सौ पच्चीस वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित स्वामी विवेकानंद का व्यक्तित्व और चरित्र विषय पर मुख्यवक्ता की आसंदी से बोलते हुए पुणे महाराष्ट्र के प्रचारक इंजी. महेश सांदीपन गायकवाड़ ने विद्यार्थियों से कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. मनोज अवस्थी ने की। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीपप्रज्वलन किया गया। अतिथि परिचय और विषय प्रवर्तन वरिष्ठ रासेयो कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संजय कुमार पाण्डेय ने किया।
मुख्यवक्ता श्री गायकवाड़ ने कहा कि युवाओं के लिए भावनात्मक स्थिरता बहुत जरूरी है। स्वामी जी भी भावनात्मक और आध्यात्मिक चेतना के आधार पर ही अल्प समय में विश्व को एक विचार से पोषित कर गए जिसकी सुगन्ध से पूरी मानव जाति महक रही है। उन्होंने कहा कि हृदय की विशालता से ही वसुधैव कुटुम्बकम के विचार को जिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान वही है जो समाज के लिए उपयोगी हो। पाठ्यक्रम के अतिरिक्त महापुरुषों के जीवन चरित्र से हम अपने व्यक्तित्व को सुन्दर बना सकते हैं।
अध्यक्षीय उद्बोधन में रासेयो जिलासंगठक एवं महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. मनोज अवस्थी ने कहा कि विचार से, कर्म से, आदत से चरित्र और चरित्र से भविष्य को बनाया जा सकता है। स्वामी विवेकानंद का सम्पूर्ण जीवन ही प्रेरणादायक है। हमें अपने आदर्श चुनते समय व्यक्ति के चरित्र और कृतित्व को ध्यान में रखना चाहिए। केवल धनबल और ग्लैमर के आधार पर हमें अपने लिए आदर्श नहीं चुनना चाहिए। सद्विचार और सदाचरण वाले व्यक्तित्व ही हमें सही मार्ग दिखा सकते हैं।
कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. विकास शुक्ल ने और आभार डॉ. संजय कुमार पाण्डेय ने दिया। इस अवसर पर डॉ. नीलेन्द्र तोमर, डॉ. राजेश मिश्रा, डॉ. विजय पाण्डेय, डॉ. कौशलेन्द्र अवस्थी, डॉ. निवेदिता पांचाल, डॉ. संगीता अग्रवाल, डॉ. सरिता दीक्षित, डॉ. प्रशांत साहू, डॉ. दीपक शिन्दे, डॉ. मंदाकिनी शर्मा, डॉ. राकेश करहेरिया, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. योजना तिवारी, डॉ.रूपाली गोखले, डॉ. दीप्ति नारंग, डॉ. चंचल शिवहरे, प्रो. प्रेक्षा नाईक, डॉ. प्रेम सिंह एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।