शनिश्चरी अमावस्या पर न्याय के देवता शनि देव पूजा अर्चना कर मांगी सुख स्मृद्धि

Oct 14 2023

ग्वालियर। आज 14 अक्टूबर शनिवार को शनि अमावस्या के अवसर पर शहर के शनि मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालूओं का पहुंचना शुरू हो गया था। न्याय के देवता भगवान शनिदेव की पूजा अर्चना कर श्रद्धालूओं ने सुख समृद्धि की कामना की। एति स्थित प्राचीन शनि मंदिर में श्रद्धालू बड़ी संख्या में पहुंचे। वहीं शहर के तारागंज एबीरोड सहित शनिमदिरों में एवं नवगृहों मंदिरों पर भगवान शनि को प्रसन्न करने के लिये बड़ी संख्या में श्रद्धालू पहुंचे थें। 
आपको बतादें कि हिंदू धर्म में शनिश्चरी अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन शनि देव की पूजा, व्रत, और अनुष्ठान किए जाते हैं। यह दिन शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है। पितृ पक्ष में आने वाली अमावस्या तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसे सर्व पितृ अमावस्या भी कहा जाता है। इस तिथि पर श्राद्ध और तर्पण करने से पितृ दोष या कालसर्प दोष जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इस बार की शनिश्चरी अमावस्या आज यानी 14 अटूबर को है जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या चल रही है उन्हें शनिश्चरी अमावस्या के दिन तर्पण, पिंडदान और पीपल की पूजा जरूर करनी चाहिए। इससे शनि का दुष्प्रभाव कम होता है। इस दिन उपवास रखकरगरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, कपड़ा, धन, या अन्य जरूरी चीजों का दान करने से पितर और शनि देव प्रस्न होते हैं। इस दिन हनुमान जी ने रावण के पैरों के नीचे से शनि देव को मुक्त कराया था एवं कई वर्षो तक दबे होने के कारण शनिदेव दुर्बल हो चुके थे। 
लंका दहन हेतु शनिदेव ने बताया था कि जब तक वे लंका में रहेंगे तब तक दहन नहीं हो सकता है एवं वे इतने दुर्बल है कि उनका चलना मुश्किल है। अत: हनुमान जी से निवेदन करने पर हनुमान जी ने शनिदेव को पूरी ताकत से भारत भूमि पर फैका एवं शनिदेव मुरैना जिले के ऐंती ग्राम के पास स्थित एक पर्वत पर जा गिरे, जिसे शनि पर्वत कहा जाता है।