भागवत कथा में श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया

Oct 12 2023

ग्वालियर। भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कृष्ण जन्म के प्रसंग शुरू होते ही पांडाल में मौजूद श्रद्धालु नंद के घर आनंद भया जय कन्हैया लाल की भजनों के साथ झूम उठे। भागवत कथा का महत्व बताया कथावाचक सरस्वती पूर्णिमा दीदी ने  बताया कि भागवत कथा सुनने से सृष्टि व मनुष्य का कल्याण होता है। भागवत कथा का आयोजन गंगा दास की बड़ी शाला लक्ष्मीबाई कॉलोनी में किया जा रहा है। 
श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के उग्रसेन राजा के बेटे कंस का वध करने के लिए हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार द्वापर युग में मथुरा के उग्रसेन राजा के बेटे कंस ने उन्हें सिंहासन से उतार कर कारगार में बंद कर दिया था और खुद को मथुरा का राजा घोषित कर दिया था। राजा की एक बेटी और एक बेटा था। बेटा कंस और बेटी देवकी। देवकी और वासुदेव को कंस ने काराग्रह में डाल दिया। फिर पहलाद की कथा सुनाई गई प्रह्लाद भगवान विष्णु के भक्त थे और हिरण्यकश्यप के पुत्र। जब प्रह्लाद को होलिका नहीं जला पाई तो। उसे मारने के लिए हिरण्यकश्यप खुद आगे आया। अपने भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह भगवान का अवतार लिया और हिरण्यकश्यप का वध किया। कहते हैं कि क्षीरसागर में ही समुद्र मंथन हुआ था। इस मंथन के दौरान मंदरांचल पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी बनाया गया था। देवता और और दैत्यों ने मिलकर इस पहाड़ के द्वारा समुद्र को मंथन किया था। इस मंथन से पहले कालकूट नामक विष निकलने के बाद 14 तरह के अद्भुत चीजें प्राप्त हुई थी जिसमें अंतिम था अमृत। देवताओं को मिला था। परम पूज्य  महाराज  डॉक्टर विकास त्रिपाठी जी द्वारा किया जा रहा है और इसकी संयोजक श्रीमती ममता सुशील कटारे जी श्रीमती रामा देवी जवाहरलाल कटारे जी द्वारा इस भागवत महा कथा का आयोजन किया जा रहा है।