महायज्ञ के तीन वर्ष चार माह पूर्ण, 22 जनवरी 2024 को होगी महायज्ञ की पूर्ण आहुति

Sep 05 2023

ग्वालियर। संकट मोचन हनुमान बालाजी धाम मंदिर गोल पाड़ा के महंत जगवीर दास ने बताया कि यज्ञ हवन अध्यात्म में एक ऐसा साधन है जिससे न दिखने वाला ईश्वर प्रसन्न होता है बल्कि तन की मन की शुद्धि होती है वातावरण की शुद्धि होती है शास्त्रों के अनुसार यज्ञ करके उस काल के मनुष्य ने ना जाने कितनी आध्यात्मिक सिद्धियां और शक्तियां प्राप्त की उनसे मानव जीवन को सफल बनाया उन सिद्धियों शक्तियों से युद्ध लड़ा और विजय हुए। 
इसी बात को ध्यान में रखकर जब 2020 के प्रारंभ से ही विश्व कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा था और अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर के शिलान्यास का अवसर था और शिलान्यास नहीं हो पाया तब उपनगर ग्वालियर के गोल पाड़ा पर जगबीर दास के द्वारा 4 मई 2020 को यज्ञ प्रारंभ किया गया। उसका फल यह हुआ कि 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री द्वारा मंदिर निर्माण का शिलान्यास किया गया। भव्य मंदिर निर्माण  में किसी तरह के विध्न बाधा ना आए इसके लिए यज्ञ को अनवरत रखा गया है अब महायज्ञ को 3 वर्ष 4 माह पूर्ण हो चुके हैं।
इस यज्ञ में शहर से कोई भी व्यक्ति आकर शामिल हो सकता है  यज्ञ प्रतिदिन रात्रि 8 बजे प्रारंभ होता है यज्ञ में 5 से 7 लोग भाग लेते हैं। यज्ञ में भाग लेने के लिए किसी भी तरह की दान दक्षिणा नहीं ली जाती है यज्ञ में शामिल होना पूर्णतया निशुल्क है। पंडित पियूष शास्त्री द्वारा वेद मंत्रों सुंदरकांड की चौपाइयां हनुमान चालीसा के द्वारा इस यज्ञ को संपन्न कराया जाता है। इस महायज्ञ की पूर्णाहुति प्रधानमंत्री द्वारा घोषित तिथि 22 जनवरी 2024 को होगी जब रामलला अपने स्थान पर विराजमान होंगे।