एस एस सी ओ संस्था प्रत्येक माह 4 कवियों का करेगी सम्मान

Aug 27 2023

ए जिंदगी मुझे अपने तौर तरीका सिखा दे,  ना ज्यादा न कम बस जरूरत भर बता दे............
ग्वालियर। समाज में होने बाले क्रियाकलापों को विभिन्न रसों मे भिगोकर सरल सहज भाषा के साथ कविता,गीत ,गजल के रूप में लोगों के बीच लाना, जिससे जनमानस उसे वेहतर तरीके से समझ सकें यहीं एक उत्कृष्ट और उत्तम कवि के गुण होतें है । ऐसे ही गुणवान और उत्तम कवियों का वृहद समुदाय आज रविवार को एस एस सी ओ के बैनर तले आयोजित कवि सम्मेलन में एकत्रित हुआ। जहाँ विभिन्न रसों में ओतप्रोत कविताओं गीत गजलों के साथ साथ शहर के विशिष्ठ कवियों का सम्मान एस एस सी ओ के प्रदेश अध्यक्ष श्याम श्रीवास्तव ने किया। 
एस एस सी ओ संगठन के बैनर तले आज रविवार को एक वृहद कवि सम्मेलन का आयोजन वरिष्ठ नागरिक सेवा संस्थान में किया गया। कार्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी देते हुए संस्था के प्रदेश अध्यक्ष श्याम श्रीवास्तव ने बताया कि आज का कवि सम्मेलन संस्था के गठन के शुभ अवसर पर रखा गया है। जिसमे मुख्यातिथि सुप्रसिद भगवताचार्य श्री घनश्याम शास्त्री जी, विशिष्ट अतिथियों में विजय सेठी अकेला जी ,जाने माने कवि डा विजय करुण जी ,श्री नयन किशोर श्रीवास्तव जी, अंशुमन शर्मा जी उपस्तिथ रहें। कार्यक्रम में अतिथियों सहित कई कविगणों ने विभिन्न रसों से ओतप्रोत कर अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से श्रोताओं को बांधे रखा।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि घनश्याम शास्त्री जी के साथ विशिष्ट कवियों  डा विजय करुण, नयन किशोर श्रीवास्तव,माला श्रीवास्तव, चेतना चौहान का सम्मान मोतियों की माला,शाल , सम्मान पत्र एवं श्री फल देकर संस्था के प्रदेश अध्यक्ष श्याम श्रीवास्तव ने किया। कवि गणों की प्रस्तुतियां इस प्रकार रहीं.....
कोई यहां झुकने को तैयार नहीं क्षण भर में रिश्तों का सफाई हो जाता है....
नयन किशोर श्रीवास्तव
रक्षा सूत्र सा श्रवण बंधन होता कहां जमाने में
लड़ाई झगड़ा कितना भी हो पर प्यार छुपा इन धागों में ........
चेतन चौहान
मन चंचल धीरे-धीरे किसी शांत नदियों के तीरे..…........
डॉ विजय करुण
ए जिंदगी मुझे अपने तौर तरीका सिखा दे
ना ज्यादा न कम बस जरूरत भर बता दे............
श्याम श्रीवास्तव
दिन डूबता ही हरदम हर शाम चला जा
दुनिया है लुटेरों की भगवान चला जा...........
रामसेवक शाक्यवार
पत्थर को भी धड़कन दे दे एहसास अगर रूहानी है 
प्यार ही जन्मों तक जिंदा हर शह  तूफानी है..........
श्रीमती माला श्रीवास्तव
सावन में आता सदा राखी का त्यौहार बहन बेटियां जा रही बाबा के घर द्वार.......
आरती श्रीवास्तव अक्षत
जमी से चांद तक पहुंचा चंद्रयान अभी मन से मन तक पहुंचना बाकी है........
अंशुमान शर्मा
ए वतन ए वतन तुझको मेरा नमन........
अनिल रही
जंगलों को गायब करके कुछ पौधे लगा रहे हो 
ढोंग रच रहे हो या पर्यावरण दिवस मना रहे हो..........
दीप ज्योति गुप्ता
भारत की पावन माटी को अपना शीश झुकाएंगे वंदे मातरम गाएंगे.........
डॉ रविंद्र नाथ मिश्रा
इन्हीं रास्तों पर खुशियां ना थी कम इन्हीं रास्तों पर पसरा है गम........
कामिनी पांडे
सच्चाई के सांचे में ढलने लगा हूं मैं शायद इसी रोग से खेलने लगा हूं मैं........
गोपाल सिंह दंडोतिया
शब्द समझ कर फेंक ना देना यहां चित्र ना सोयी है
महज गीत ही नहीं दूध में रुई भिगोई है........
प्रदीप पुष्पेंद्र
दम टूट चुका है फिर भी नजरे दर-दर पर है लगी दीवाने की
पथराई हुई पलकों मे है उम्मीद किसी के आने की..........
विजय सेठी अकेला
हम हैं छप्पन इंची सीना चढ़े क्षितिज को फांदकर...........
जगमोहन श्रीवास्तव
आज हम अपनी ताकत आजमाना चाहते हैं 
फिर आज दुनिया को हराना चाहते हैं.........
मोहन योगी
डॉक्टर तस्लीम एवं अन्य वरिष्ठ जनों ने भी अपनी रचनाएं पड़ी। 
कार्यक्रम का संचालन सीता पाणीग्राही  ने किया । अंत में संस्था के प्रदेश अध्यक्ष ने सभी अतिथियों एवं कवि गणों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था प्रत्येक माह कवि गोष्ठी के अंतर्गत 4 कवियों का सम्मान किया करेगी। इसके उपरान्त सभी ने स्वल्पाहार लिया। इस अवसर पर कवि गनों सहित संजय बंसल जी ,हरी ओम शर्मा जी,लोकेन्द्र भार्गव,संतोष गुप्ता,प्रिंस श्रीवास्तव , गोपाल शिवहरे आदि मौजूद रहे।