दृढ़ संकल्प और पुरुषार्थ ही हमारे जीवन को मर्यादित बनाते है-गणिनी आर्यिकाश्री

Aug 21 2023

ग्वालियर। हमारा जीवन स्वार्थपरक नहीं, परमार्थपरक होना चाहिए। इस जीवन को यदि परमार्थ भाव से जिएंगे तो भव भव से पार हो जाएंगे। हमें इस छोटे से जीवन को परोपकार के कार्य कर इसे सार्थक करना चाहिए। संकल्प, साधना और पुरुषार्थ के बिना हम जीवन को सार्थक नहीं कर सकते है। यह विचार पूज्य गणिनी आर्यिकाश्री अंतसमती माताजी ने सोमवार को माधौगंज स्थित पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में ज्ञान वात्सल्य पावन वर्षायोग समिति के तत्वावधान में चल रहे 44 दिवसीय भगवान पार्श्वनाथ महार्चना श्री कल्याण मन्दिर विधान में धर्मसभा को संबोधित करते व्यक्त किये। मंच पर क्षुल्लिकाश्री रत्न आप्तमती माताजी भी मौजूद थी।
गणिनी आर्यिकाश्री ने कहा कि दृढ़ संकल्प और पुरुषार्थ ही हमारे जीवन को मर्यादित बनाते है। कोई भी सृष्टि हुई है, नया निर्माण हुआ है तो संकल्प से ही हुआ है। संकल्प करने से मन में उत्साह का संचार होता है और जब तक कार्य पूर्ण नहीं हो तब तक उत्साह बनाए रखना चाहिए। मनुष्य के संकल्पों में दृढ़ता न हो तो उसका पुरुषार्थ भी चिर स्थायी नहीं होता। जीवन को अनूठा एवं विलक्षण बनाने के लिए हमें शस्त्र नहीं, संकल्प चाहिए। संकल्प शक्ति से व्यक्ति के जीवन और ऊर्जा का निर्माण होता है। इसीलिए संकल्प शक्ति के साथ पुरुषार्थ करना चाहिए। सभी साधन हो और पुरुषार्थ नहीं करें तो वह कार्य भी पूर्ण नहीं हो सकता है। 
आज चढ़ेगा 23 वे तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक पर लड्डू
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि गणिनी आर्यिकाश्री अंतसमति माताजी के सानिध्य में 23 अगस्त को माधौगंज जैन मंदिर में जैन धर्म के 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्षकल्याण महोत्सव आयोजित होगा। जिसमे प्रात: 7:30 बजे से संगीतमय कल्याण विधान में भगवानउ का कलशो से अभिषेक, पूजन, प्रवचन के उपरांत 23 किलो का निर्वाण लड्डू भक्तिभाव के चढ़ाया जायेगा।