पुरुषोत्तम मास के चौथा व आखिरी सोमवार पर श्रद्धालुओं ने किया अभिषेक

Aug 14 2023

ग्वालियर। सावन मास का छठवां और पुरुषोत्तम मास का चौथा व आखिरी सोमवार 14 अगस्त को पुनर्वसु एवं पुष्य नक्षत्र में मनाया गया। इसके साथ ही गजकेसरी योग के साथ सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि योग, शश नामक पंच महापुरुष योग, धूम्र योग भी है। इन शुभ योगों में मनोरथ सिद्धि के साथ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य लाभ के लिए भगवान शिव की आराधना के लिए श्रद्धालु ज्यादा संख्या में मंदिरों में पहुंचे। घर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर अभिषेक किए गया।
देर रात से श्रद्धालुओं का शिवालयों में पहुंचना शुरू हो गया था। अचलेश्वर महादेव मंदिर पर तडक़े से ही श्रद्धालुओं की लाइन लगनी शुरू हो गई थी। सुबह से ही मंदिरों में हरहर महादेव, ओम नम: शिवाय के नारे गूंजने लगे थे। वहीं प्रबंधन श्रद्धालुओं से मंदिर में पॉलीथिन लेकर न आने की अपील कर रहे थे। अचलेश्वर पर व्यवस्थाएं बनाने के लिए 10 बाउंसर लगाए गए थे। पुलिसकर्मी भी व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे थे। 
सोमवार को अचलेश्वर मार्ग पर वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया था। श्रद्धालुओं ने परिवार में सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना को लेकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए अचलेश्वर प्रबंधन ने भक्तों के मंदिर में प्रवेश करने और बाहर निकलने के लिए अलग-अलग व्यवस्था की थी। साथ ही मंदिर के बाहर से ही श्रद्धालु अचलनाथ के दर्शन कर सकें इसके लिए प्रबंधन द्वारा विशेष व्यवस्था कर मुख्य मार्ग वाले द्वार से व्यवस्था की गई थी। सुबह श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा होने की वजह से पुलिस को स्टॉपर लगाकर ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा। शहर के अन्य शिव मंदिरों भूतेश्वर गुप्तेश्वर, कोटेश्वर, हजारेश्वर, मार्कंडेश्वर महादेव मंदिर पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
पुरुषोत्तम मास में जप, व्रत, दान, पवित्र नदियों एवं मंदिरों में दीपदान करना, पुरुषोत्तम मास की कथा सुनना विशेष शुभ फलप्रद रहता है। पुरुषोत्तम मास का आखिरी सोमवार होने से श्रद्धालुओं ने अधिक से अधिक मंदिरों में पहुंचकर भोलेनाथ का रुद्राभिषेक कर पूजन किया। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और उनकी सभी मनोकामना पूरी हो जाती हैं। इस वजह से सोमवार को भगवान शिव की आराधना और व्रत करने वाले श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचे। कोटेश्वर महादेव मंदिर, गुप्तेश्वर महादेव मंदिर सहित शहर के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। देर रात से यहां श्रद्धालुओं का शिवालयों में पहुंचना शुरू हो गया था।
सावन के इस पवित्र माह में भगवान भोले की भक्ति करते हुए शिवालयों में भगवान शिव का दूध, गंगाजल, पंचामृत से अभिषेक जलपात्रों के माध्यम से किया जा रहा है। अभिषेक के कारण दूध की डिमांड बढ़ी हुई है। सावन के सोमवार को सबसे ज्यादा दूध की डिमांड रही। शिवालयों के आस-पास स्थित सभी दुकानों में दूध की जमकर बिक्री हो रही है। आखिरी सोमवार होने के कारण दुकानदारों ने दूध भी अधिक मात्रा में मंगाया था। दूध विक्रेता सोनू जैन का कहना है कि सावन के माह में दूध की खपत बढ़ जाती है।