निजी हॉस्पीटल के प्रचार में दिखे जीआर मेडीकल कॉलेज के दो प्रोफेसर, एक पूर्व डीन भी रह चुके है

Aug 09 2023

ग्वालियर। जयारोग्य अस्पताल समूह में अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और बदइँतजामी की खबरें सुर्खियां बना करती है यहां के कई वरिष्ठ चिकित्सक इसके लिए भी अक्सर एक दूसरे पर आरोप मढ़ा करते है। लेकिन अब एक तस्वीर और जो खबर सामने आई है उससे लगता है कि कुछ डॉक्टर कागजों पर नौकरी तो यहां करते है लेकिन मेहनत कहीं और ही कर रहे है वो फाईव स्टार हॉस्पीटल चलाने में व्यस्त है। जब ऐसा करने वाले बेहद सीनियर डॉक्टर जो जीआर मेडीकल कॉलेज के डीन भी रह चुके हो तो अब क्या ही कहा जाए।
ग्वालियर के शिवपुरी लिंक रोड स्थित एक निजी अस्पताल लिंक हॉस्पीटल में पत्रकारवार्ता का आयोजन किया जाता है। इस पत्रकारवार्ता में लिंक हॉस्पीटल में विश्वस्तरीय इमरजेंसी विभाग के शुभारंभ की जानकारी दी जाती है। 
इस संबंध में और भी अन्य जानकारियां पत्रकारों को देने के लिए चार चिकित्सक लिंक हॉस्पीटल का प्रचार करने वाले बैनर के सामने डॉ. आर्थोपेडिक विभाग के समीर गुप्ता और एनेस्थिसिया विभाग के डॉ. जितेंद्र अग्रवाल बैठे थे। बेहद ताज्जुब की बात है कि दोनों वर्तमान में ग्वालियर के जीआर मेडीकल कॉलेज में प्रोफेसर है।
डॉ. समीर गुप्ता तो जीआर मेडीकल कॉलेज के डीन भी रह चुके है और वर्तमान में आर्थोपैडिक विभाग के एचओडी है। और जीआरएमसी के बेहद सीनियर डॉक्टर है। सरकारी मेडीकल कॉलेज में नौकरी के दौरान निजी अस्पताल में बैठकर पत्रकारवार्ता लेना और पत्रकारों को उस अस्पताल की खूबियां गिनाना मप्र शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग के कौनसे नियम में है। ये काफी अचंभे की बात है। डॉ समीर गुप्ता ने तो इस संबंध में इलेक्ट्रॉनिक और डिजीटल मीडिया को इंटरव्यू तक दिए है।
डॉक्टर समीर गुप्ता और डॉ जितेंद्र अग्रवाल के लिंक हॉस्पीटल के प्रति इस लगाव और समर्पण को देखकर लगता है कि वो जीआरएमसी के विधार्थियों और जयारोग्य अस्पताल समूह के मरीजों को अपना बहूमूल्य समय कितनी मुश्किल से दे पाते होंगें। या फिर दोनों जगह सांमजस्य बिठाने में उन्हे कितनी मशक्कत करनी पड़ती होगी। इस संबंध में बात करने के लिए डॉ समीर गुप्ता से दो बार संपर्क किया गया, लेकिन उनसे बात नही हो सकी।
इस मामले में जीआर मेडिकल कॉलेज के डीन अक्षय निगम ने कहा कि ग्वालियरअगर जीआर मेडीकल कॉलेज के डॉक्टर्स द्वारा इस तरह निजी अस्पताल में पत्रकारवार्ता ली गई है और उस हॉस्पीटल की ब्रांडिग की गई है तो ये काफी गलत है। और नियमविरूद्ध है। कोई भी सरकारी चिकित्सक इस तरह नही कर सकता। जहां तक एक्शन लेने की बात है तो ये मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर है।