ओजस्विनी विचार मंच का मासिक कार्यक्रम संपन्न हुआ

Aug 08 2023

ग्वालियर। ओजस्विनी विचार मंच का मासिक कार्यक्रम संपन्न हुआ जिसमें 112 बहनों ने उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ शोभा भारद्वाज उपस्थित थी। मुख्य वक्ता के रूप में सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीमती मोनिका अरोड़ा का विस्तृत एवं सारगर्भित उद्बोधन प्राप्त हुआ। श्रीमती मोनिका अरोड़ा ने कहा जब क्रिमिनल लॉ एक है, सिविल लॉ एक है तो फैमिली लॉ क्यूं एक नहीं होना चाहिये हमारे पारिवारिक मामलों (महिला एवं बच्चों से संबंधित) के लिए एक कानून नहीं है।  
समान नागरिक संहिता एक मानव अधिकार है यह धर्म जाति से ऊपर है। कोई भी धर्म जाति मजहब महिला एवं बच्चों के खिलाफ होगा तो उसका अंत होगा ही जहां आजादी से पूर्व हिंदू समाज में राजा राममोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसे अनेक समाज सुधारकों ने ब्रिटिश शासन  में मुगल काल से चली आ रही है। 800 साल पुरानी कुरीतियां सती प्रथा, विधवा विवाह, बालिका शिक्षा, बच्चों की विवाह के लिए आयु आदि के कानून बनाये। 1937 देशमुख एक्ट अनेक कानून लाए एवं सुधारों की बयार आई। वही मुस्लिम समाज में कानून लिखा ही नहीं गया शायरा बानो से लेकर शाहबानो तक अनेक मुस्लिम बहनों ने लंबी लड़ाई लड़ी अभी भी सायरा बानो एवं शाहबानो जैसी अनेक बहनों को आगे आना होगा। यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) अधिकार है, सम्मान है एवं समानता से जीने का मानव अधिकार है। परिवार एवं स्त्री को पूजने वाली भारतीय संस्कृति में यूनिफॉर्म सिविल कोड संस्कृति का रक्षण है।
कार्यक्रम का संचालन ओजस्विनी विचार मंच की मीडिया प्रभारी श्रीमती मानसी सोलापुरकर द्वारा किया गया। सटीक प्रस्तावना उपाध्यक्ष डॉ रितु नामधारी द्वारा रखी गयी। सुमधुर ऊर्जावान गीत की प्रस्तुति सचिव श्रीमती नीलम शुक्ला, अतिथि परिचय कु. रिचा गुप्ता एवं तकनीकी संचालन का कार्यभार संभाला, मीना शर्मा और डॉ कल्पना शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।