कम पढ़ा व्यक्ति परिश्रम व अनुशासन से करता है काम:रघुनाथ मेडगे

Jul 30 2023

ग्वालियर। पढ़े लिखे लोगों की तुलना में कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति जयादा शारीरिक परिश्रम, अनुशासन के साथ काम कर सकता है। आप उन्हें बेहतर तरीके से गाइड कर सकते हो, उनके सामने एक बोलता है तो 99 सुनते हैं जबकि आज देश में 99 बोलते हैं और एक भी नहीं सुनता है, यह बात मुंबई में डब्बा सप्लाई की चेन चलाने वाले मुंबई डब्बेवाला संगठन के अध्यक्ष रघुनाथ मेडगे ने चेम्बर भवन में मप्र चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री एवं ग्वालियर मैनेजमेंट एसोसिएशन के संयुक्त तत्वधान में आयोजित मुम्बई डब्बेवाला मोटिवेशनल कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में कही। उन्होंने संघर्ष से सफलता का बेहतर उदाहरण सम्पूर्ण विश्व में प्रस्तुत करने वाले मुंबई डब्बेवाला संगठन के अनुभव एवं उनके मैनेजमेंट सिस्टम के बारे में प्रकाश डाला, वहीं उपस्थित लोगों को मैनेजमेंट के टिप्स बताए।
संघर्ष से सफलता का राज बताते हुए रघुनाथ मेडगे कहा कि हम 99.99 प्रतिशत परफोर्मेंस के साथ 100 प्रतिशत कस्टमर केयर एवं सेटिशफेक्शन के सिद्धांत पर काम करते हैं। इसके साथ सफल होने के लिए हम जीरो फ्यूल, जीरो पॅाल्यूशन, जीरो इनवेस्टमेंट, जीरो माडर्न टेक एवं जीरो डिस्प्यूट को टारगेट करके चलते हैं। उन्होंने बताया कि हमारे इस कार्य में 5000 हजार लोग काम करते हैं, जिनमें 2000 से ज्यादा बिना पढ़े लिखे हैं जो आज भी कागज पर अंगूठा लगाते हैं। हमारा कार्य ज्यादा पढ़े लिखे लोगों का काम नहीं है। अपितु मेहनतकश लोगों का है। 
हमारा साथी एक साथ सिर पर 60 से 65 किलो वजन के 50 से ज्यादा टिफन लेकर चलता है। हमारे सभी साथी लोग 99 प्रतिशत हमारी बात सुनते ही नहीं अपितु उस पर गंभीरता से अमल भी करते हैं। ट्रांसपोर्टेशन के लिए हम मुंबई की लाइफ लाइन लोकल ट्रेन का उपयोग करते हैं, वहीं डिलिवरी देने एवं डब्बा कलेक्शन के लिए साइकिल का उपयोग करते हैं।
130 साल में कभी नहीं हुई हड़ताल
डब्बे वालों का मैनेजमेंट आपने कहा कि हमारे संगठन में आज तक किसी भी प्रकार की कोई हडताल नहीं हुई है। विगत 130 वर्षों से भी अधिक समय से हम निर्धारित समय पर लोगों को डब्बा पहुंचा रहे हैं। हमारा जो चैन सिस्टम है, वह देश के लगभग सभी आईआईएम संस्थानों में केस स्टडी के रूप में पढ़ाया जाता है। हम अपने ग्राहक को महाराजा का दर्जा देते हैं।
टाइम मैनेजमेंट के साथ अनुशासन जरूरी
हमारे काम में टाइम मैनेजमेंट के साथ अनुशासन बहुत जरूरी है। इसी की दम पर 5000 हजार साथियों की टीम की सहायता से रोजाना सुबह 9.30 से 12.30 के बीच 3 घंटे के मामूली समय में 70 किलो मीटर की लम्बाई कवर कर लगभग 4 लाख डिब्बों का ट्रांजेक्शन संस्था द्वारा समय की पावंदी के साथ अपने ग्राहकों को किया जा रहा है। हमारे संगठन में अनुशासन, समर्पण, समय की पाबंदी, काम के समय में किसी भी प्रकार का नशा करने पर सख्त पावंदी हैं। बावजूद इसके यदि कोई नशा सहित पाया जाता है, तब उसके ऊपर एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाता है। सभी लोगों को टोपी पहनना एवं आई कार्ड रखना अनिवार्य है। 
प्रारम्भ में अध्यक्ष-डॉ. प्रवीण अग्रवाल एवं जीएमए के सचिव श्याम अग्रवाल ने फल की टोकरी भेंट कर मेडगे का स्वागत किया गया। संचालन मानसेवी सचिव-दीपक अग्रवाल ने व स्मृति चिन्ह, चेम्बर उपाध्यक्षडॉ. राकेश अग्रवाल व जीएमए के संयुक्त सचिव, इंजी. मोहित वर्मा द्वारा प्रदान किया गया।