बच्चों के बदलाव पर रखें नजर ग्वालियर। मुरार में पांच साल की बच्ची से दो किशोरों द्वारा दुष्कर्म की घटना के बाद जब सुदर्शन एक्सप्रेस ने शहर के एक्सपर्ट से चर्चा की तो उनका कहना था कि समाज में विकृति बढ़ी है। परिजनों को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए, समय-समय पर बातचीत करें, जिससे वह भटकाव के रास्ते पर ना जाएं। अभिभावकों का काम है कि उनसे कौन मिल रहा है और क्यों मिल रहा है। जिससे बालक व बालिका गलत संगत में ना पडें़ मित्रवत करें व्यवहारकिशोरमय बालक-बालिका के व्यवहार में उम्र के इस मोड पर बदलाव आता है, क्योंकि यही उम्र होती है, जब बच्चे भटकाव के रास्ते पर चले जाते हैं। जब भी इस तरह की स्थिति बने उनसे मित्रवत व्यवहार करें और उनसे ज्यादा से ज्यादा बात करें, जिससे वह उस भटकाव से बच सकें। यह बात एसएसपी राजेश सिंह चंदेल ने किशोरमय बच्चों में आ रहे भटकाव पर सुदर्शन एक्सपे्रस से चर्चा करते हुए कहीनाराजगी-गुमसुम है बदलाव का कारणकिशोर उम्र पर आते ही बच्चों में परिवर्तन आता है और इसका प्रमुख कारण गुमसुम रहना या फिर नाराज होना है। जब ऐसी स्थिति बने तो माता-पिता को उसे वॉच करना चाहिए। साथ ही ध्यान देना चाहिए कि वह किससे बात कर रहा है और उसकी बातचीत किस तरह की हो रही हैबच्चों को दें समय आजकल परिजन और बच्चे ज्यादातर अपना समय बिजी रखते हंै और सिर्फ पढ़ाई से संबंधित बातचीत के बाद अपने आप में बिजी हो जाते हैं, जिससे बच्चे बाहरी लोगों से मेलजोल रखना शुरू कर देते हंै, यह भी उनके लिए खतरनाक होता हैसोशल मीडिया पर रखें नजर बालक या बालिका सोशल मीडिया पर क्या देख रहा है और उसकी बातचीत किस-किस से हो रही है, इस पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि इस उम्र में गलत और सही का आकलन बालक या बालिका नहीं कर पाते हैं। साथ ही आजकल बच्चों में रील देखने का चलन बढ़ गया है, जिस पर अच्छाई के साथ गंदगी भी है, यह भी मानसिक विकृत्ति को बढ़ावा देती है

Jul 24 2023