जिला स्तरीय शिक्षा सम्मेलन आयोजित किया गया

Jul 22 2023

ग्वालियर। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के चलते स्कूल कॉलेजों व विश्विद्यालयों में चल रही तमाम समस्याओं व गड़बडिय़ों और उनके वैज्ञानिक समाधान विषय पर ऑल इंडिया सेव एजुकेशन कमेटी के बैनर तले ग्वालियर में जिला स्तरीय शिक्षा सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मौजूदा छात्र साथियों द्वारा धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और जनवादी शिक्षा के महत्व पर आधारित गीतों से की गई। छात्र संगठन एआईडीएसओ के जिला उपाध्यक्ष दीपक बरैया ने अपने वक्तव्य में कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा के हालात इतने भयावह हैं। कि वक्त पर परीक्षाओं का संचालन ना होने और परीक्षा परिणाम घोषित ना होने के चलते 2 से 3 साल खराब होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। 
केवल ग्वालियर में ही 2000 से अधिक और प्रदेश के 2 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक अंधकारमय भविष्य से आशंकित हैं। स्कूली शिक्षा हो या उच्च शिक्षा सभी स्तर पर शिक्षक और अध्यापकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में उलझा कर तकनीकी कर्मचारियों में तब्दील कर दिया गया है। छात्र केवल शिक्षा हासिल करने की तकनीकी प्रक्रियाओं में उलझ कर रह गए हैं और सामाजिक ताने-बाने से कटकर मशीनों में तब्दील रहे हैं।
ऑल इंडिया सेव एजुकेशन कमेटी के जिला प्रभारी विद्या ने अपने उद्बोधन में कहा पढ़ाई के लिए सभी शिक्षण संस्थानों में जरूरी मूल ढांचे सुविधाएं जैसे लाइब्रेरी, लैब्स में आवश्यक उपकरण, पर्याप्त संख्या में कक्षाएं, शिक्षक,  तकनीकी स्टाफ और पीने योग्य पानी आदि  का भारी अभाव है। केंद्र व राज्य सरकार को जमीनी स्तर पर इन सभी कमियों को पूरा करने की जरूरत थी, लेकिन  एनईपी 2020 के द्वारा उल्टे  सार्वजनिक शिक्षा को खत्म कर शिक्षा के निजीकरण, व्यापारीकरण, सांप्रदायिकरण को ही बढ़ावा दिया जा रहा है। 
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन की प्रदेश सचिव रचना अग्रवाल ने अभिभावकों व छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि अकादमिक शिक्षा समाज के विशाल ज्ञान भंडार का ही एक हिस्सा है, पूरी तरह सामाजिक संपदा है, जिस पर देश के हर बच्चे का समान हक है। किंतु हमारी केंद्र व राज्य सरकारों ने शिक्षा को बाजार में तब्दील कर धनी लोगों की संपत्ति बना दिया है। शिक्षा में असीमित लाभ उठाने के अवसर देखकर देशी, विदेशी पूंजी शिक्षा क्षेत्र में खुली लूट चला रही है। शिक्षा का व्यापारी करण-निजीकरण कर उसे अवैज्ञानिक बनाया जा रहा है। इसी उद्देश्य से बनाई गई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के दौरान असंख्य गड़बडिय़ां कर हजारों छात्रों के भविष्य को बर्बाद किया जा रहा है। 
ऐसी स्थिति में जरूरत है कि छात्र, अभिभावक, शिक्षक सभी एकजुट होकर वैज्ञानिक, जनवादी, धर्मनिरपेक्ष शिक्षा को हासिल करने की लड़ाई में शामिल हों और एक जबरदस्त आंदोलन गठित करें। कार्यक्रम में छात्र संगठन एआईडीएसओ कि जिला सचिव मंडल सदस्य व छात्र प्रतिनिधि के तौर पर समरीन खान ने भी अपनी बात रखी व कार्यक्रम का संचालन श्वेता मौर्य ने किया। व अन्य छात्र-छात्राओं ने भी अपनी बात रखी। बड़ी संख्या में शामिल छात्र-छात्राओं और अभिभावकों द्वारा सार्वजनिक शिक्षा बचाओ मानवता बचाओ आंदोलन तेज करने के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।