सावन के सोमवार को पड़ी सोमवती अमावस्या शिवालयों में कांवडिय़ों ने विभिन्न स्थानों से भरकर लाए गए गंगाजल से अभिषेक किया

Jul 17 2023

ग्वालियर। सावन के दूसरे सोमवार को सोमवती अमावस्या पढऩे से इस दिन का महत्व और बढ़ गया है। यह दुर्लभ संयोग करीब 57 साल बाद बना है। यही कारण है कि सोमवार सुबह से मंदिरों पर शिवभक्तों की भीड़ लगी थी। लोग शिवालयों में शिवलिंग का अभिषेक कर रहे हैं। बेल पत्र चढ़ाकर अराधना कर रहे हैं। रात 12 बजे से ही शहर के प्रमुख शिव मंदिरों पर कांवडिय़ों का आना शुरू हो गया था।
कांवडिय़ों द्वारा विभिन्न स्थानों से भरकर लाए गए गंगाजल से अभिषेक किया। सोमवती अमावस्या होने पर मंदिरों पर फेरी देने वालों की भीड़ भी देखते ही बन रही थी। सोमवार सुबह 4 बजे से ही शहर के अचेश्वर महादेव, कोटेश्वर महादेव, गुप्तेश्वर महादेव शिवालयों पर भक्तों की भीड़ लगना शुरू हो गई थी।
मंदिर में दर्शन करने के लिए सडक़ों पर दूर-दूर तक लाइन लगी थी। मंदिरों के आसपास बेलपत्र, धतूरा, दूध, दही पंचामृत की दुकानें सजी हैं। अचलेश्वर मंदिर रोड को भक्तों की भीड़ को देखते हुए बड़े व चार पहिया वाहनों का प्रवेश बैरीकेड्स लगाकर बंद कर दिया था। इंदरगंज से आने वाले वाहन जीवायएमसी में ही पार्क किए गए।
सावन के सोमवार को विधि-विधान से शिव पूजन कर शांति-समृद्धि मिलती है। इतना ही नहीं विवाह के इच्छुक युवक-युवतियों को भी शिव की कृपा जरूरी है। सोमवती अमावस्या और सावन का सोमवार के दुर्लभ संयोग पर पूजा अर्चना करने से मनचाहा वर मिलता है। सोमवार को मंदिरों पर उमडऩे वाली भीड़ को देखते हुए मंदिर समितियों ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। साथ ही महिला एवं पुरुषों अलग-अलग लाइन में लगकर दर्शन कर रहे थे।
ग्वालियर में अचलेश्वर महादेव मंदिर, कोटेश्वर महादेव मंदिर, गुप्तेश्वर महादेव मंदिर, चकलेश्वर और भूतेश्वर, हजारेश्वर शिव मंदिर हैं। इन शिव मंदिरों पर सोमवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी है। यहां हर सोमवार को होने वाले विशेष अभिषेक व पूजन फिलहाल नहीं कराया जा रहा है।
भगवान शिव को सावन का सोमवार विशेष रूप से प्रिय है। पंडित रामकृष्ण बताते हैं कि सावन में भगवान शिव का गंगाजल व पंचामृत से अभिषेक करने से शांति मिलती है। बेलपत्र, भांग, धतूरा, आक के फूल से पूजन करने का प्रावधान है। इसके अलावा पांच तरह के जो अमृत बताए गए हैं उनमें दूध, दही, शहद, घी व शक्कर मिलाकर बनाए गए पंचामृत से भगवान की पूजा विशेष लाभदायी होती है। शिव मंदिरों के बाहर कई संस्थाओं ने पंचामृत के स्टॉल लगाकर वितरण किया है।
भितरवार में धूमेश्वर मंदिर पर लगा मेला
ग्वालियर के भितरवार सर्कल में सिंध और पार्वती नदी के संगम तट पर प्राचीन धूमेश्वर मंदिर है। यह कब बना और किसने बनवाया यह कोई नहीं बता पाता, लेकिन सावन के हर सोमवार को यहां मेला लगा है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे थे। और मंदिर के किनारे बसी नदी में स्नान कर शिवलिंग की पूजा अर्चना की। यह मंदिर ग्वालियर शहर से करीब 75 किलोमीटर दूर है।
मंदिरों के आसपास कड़ी सुरक्षा
सोमवार को शिवालयों के आसपास कड़ी सुरक्षा देखने को मिली है। एसपी ग्वालियर राजेश चंदेल ने मंदिरों के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लगाने के निर्देश दिए थे। मंदिरों के आसपास पुलिस के चेकिंग पॉइंट बनाए गए हैं, जिससे महिलाओं के साथ कोई भी घटना न हो सके। मंदिरों पर भीड़ लगने पर ट्रैफिक को नियंत्रण करने के लिए अलग से पुलिस बल तैनात किया गया है।
सोमवार को सुबह से धूप निकली और उमस थी। जिस कारण शिव भक्त मंदिर में पसीने से नहा रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी शहर के लोगों की शिव भक्ति कम होने का नाम नहीं ले रही थ्ी। सुबह 5 बजे से अचलेश्वर मंदिर के बाहर भीड़ लगना शुरू हुई थी जो देर रात तक जारी थी। दूर-दूर तक भक्तों की लाइन लगी थी।