बदलाव
Jul 14 2023
मेरी स्थिति का बदलाव देखा
क्या तूने मेरी कल्पनाओं का चुनाव देखा
मैं थी शक्ति, भक्ति का संचार थी मैं, बदलाव तो भारी था ज्वाला तूफ़ान मेरे अंदर जारी था
मैं पढ़ती थी, मैं लिखती थी, अंगारों में जलकर पकती थी
अस्त्र शस्त्र भी थे मेरी ढाल, हर विद्या में कुछ नया सा मैं रचती थी
पिता की मैं शान, भाइयों की मैं जान, समाज का एक सुनहरा हिस्सा थी
खामोशी कहां तब मेरा गहना था, सिर्फ तस्वीरों में ही पहना था
मेरे हिस्से की जमीन थी, उस पर मैंने कईयों घुड़सवारीयां की थी
अब वहाँ लाशों का ढेरा है, सूरज की किरणों तक का बंटवारा घनेरा है
बदला रूप तेरा था, पर्दा किया मेरा था, तेरे कदमों की भटक ने मेरे कदमों को जकड़ा था
मैं कहां भूली वो लाशें जिसे तूने पत्नी धर्म कहकर जलाया था
मेरे अस्तित्व की आग को मुझसे बिन पूछे ही दफनाया था
मैं लड़ती रहीं खुद से, सकारात्मक बदलाव का अंधेरा घनेरा था, मेरे अस्तित्व की आग में चिंगारी बाकी है, मैं लडूंगी पता नहीं कब तक लेकिन अभी लड़ाई जारी है
आस्था त्रिपाठी
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
MP Info News
Invalid RSS feed URL.
ब्रेकिंग न्यूज़
विज़िटर संख्या
अन्य ख़बरें
-
-
-
*हेमू कालानी जन्मोत्सव मिष्ठान वितरण कर बनाया* *
—03/23/2019 -









