ईकोग्रीन कर्मचारियों की हड़ताल जारी, कई क्षेत्रों में नहीं हो रहा कचरे का कलेक्शन

Jul 08 2023

ग्वालियर। पिछले एक सप्ताह से ईकोग्रीन कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर में आधे से अधिक टिपर वाहन नहीं चल पा रहे और जिस समय स्वच्छता का सर्वेक्षण होना है उस समय शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। कई क्षेत्रों में टिपर वाहन नहीं पहुंच रहे और हालात यह है कि जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं।
इतना ही नहीं बारिश के मौसम में कचरे का उठान न होने के कारण विभिन्न संक्रामक बीमारियां पांव पसारने लगी हैं जिसके लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रसित होकर चिकित्सकों की शरण में पहुंच रहे हैं। हड़ताली कर्मचारियों ने दो टूक कह दिया कि अब आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
जब तक हमारी मांग को पूरा नहीं किया जाता तब तक हड़ताल जारी रहेगी। कर्मचारियों ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द किसी प्रकार का एक्शन नहीं लिया गया तो वह सडक़ों पर कचरा फैंक कर अपना विरोध प्रदर्शन करेंगे और उग्र आंदोलन करेंगे।
उल्लेखनीय है कि ईकोग्रीन कंपनी के कर्मचारियों की हड़ताल अब भी जारी है। इसके चलते निगम के 230 में से सिर्फ 100-125 टिपर ही डोरटू-डोर कचरा कलेशन के लिए निकल पा रहे हैं। पूरी संख्या में टिपर वाहन न चलने के कारण शहर में अलग-अलग स्थानों पर कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं। सभी घरों से कचरा कलेक्शन नहीं हो पा रहा है। इन कर्मचारियों की मांगें हैं कि उन्हें नियमित किया जाए, साथ ही तीन साल का पीएफ भी खातों में जमा किया जाए। नगर निगम पीएफ देने को राजी है, लेकिन नियमित करना शासन स्तर का निर्णय होने के कारण उन्हें आउटसोर्स पर रखने को तैयार है। नगर निगम के डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने वाले टिपर वाहनों को ईकोग्रीन के कर्मचारी ही चलाते थे। इनमें ड्राइवर और हेल्पर शामिल हैं। इससे पहले ईकोग्रीन के 485 कर्मचारियों ने जून माह में अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की थी। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें निगम ने अधर में लटका रखा है। उन्हें निगम से मिलने वाला वेतन भी कंपनी से मिलने वाले वेतन के मुकाबले काफी कम है।
कर्मचारियों को पिछले तीन साल से सिर्फ आश्वासन ही दिए जा रहे हैं, लेकिन अधिकारी उनकी मांगों को लेकर गंभीरता से विचार नहीं कर रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह से लेकर महापौर निवास पर विधायक डा. सतीश सिंह सिकरवार को भी ज्ञापन सौंपा था। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें नगर निगम में नियमित कर्मचारी के रूप में रख लिया जाए। यदि उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और शहर की सडक़ों पर कचरा फेंकना शुरू कर देंगे। इस संबंध में कुछ कर्मचारियों ने भोपाल जाकर भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने के प्रयास किए हैं। तब तक के लिए हड़ताल को जारी रखा गया है।