ज्ञानवापी में जो शिवलिंग है उसकी पूजा करने का अधिकार हमको दिया जाए- शंकराचार्य विमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
Jul 01 2023
ग्वालियर। प्रश्न हमारी आस्था का है, प्रश्न हमारी परंपरा का है। हम सरकार से सिर्फ यही चाहते हैं की ज्ञानवापी में जो शिवलिंग है उसकी पूजा करने का अधिकार हमको दिया जाए। यह अधिकार हमको नहीं मिला इसके बाद हम न्याय की शरण में कोर्ट गए हैं। यह बात शनिवार को जगतगुरु शंकराचार्य विमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक पत्रकार वार्ता के दौरान संवाददाताओं से कही।
शंकराचार्य ने कहा कि जब हमारे सामने भगवान प्रकट होते हैं तो हम उनकी स्तुति करते हैं उनकी पूजा करते हैं, यह परंपरा रही है पुराणों में भी यही उल्लेख है। वाराणसी के ज्ञानबापी में भी यही स्थिति देखने को मिल रहा है। भगवान हमारे सामने थे हम उन्हें देख नहीं पा रहे थे। भगवान प्रकट हो गए तो यह हमारा नियम है कि हम उनका पूजा संस्कार प्रारंभ करें। हमारी मांग सिर्फ इतनी ही है।
क्योंकि यह विवाद का मामला था तो सामने वाला पक्ष न्यायालय चला गया। न्यायालय में जाकर उस पक्ष ने कहा कि नहीं वह शिवलिंग नहीं है वह फुब्बारा है। लेकिन न्यायालय ने यह कहते हुए मना कर दिया कि शिवलिंग मिला है और उसकी सुरक्षा करना हिंदू धर्म के लिए बहुत ही आवश्यक है।
शंकराचार्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी स्पष्ट उल्लेख है कि शिवलिंग का ड्यू प्रोटेक्शन करना बहुत ही आवश्यक है। ड्यू प्रोटक्शन का मतलब यह है कि उसका संरक्षण किया जाए उसकी प्रारंभिक पूजा-अर्चना की जाए हमारी मांग सिर्फ इतनी ही थी। लेकिन वाराणसी के प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की अवहेलना की है।
जगतगुरु शंकराचार्य के आदेश पर हम वाराणसी गए थे जैसे ही हम ज्ञानवापी के अंदर पहुंचे पूजा अर्चना करने के लिए तो हमें धक्का देकर बाहर कर दिया गया। क्योंकि हम पूजा अर्चना के लिए निकले थे। पूरे 5 दिन तक निर्जलाव्रत धारण करते हुए ज्ञानवापी की समक्ष ही बैठे रहे लेकिन वहां के प्रशासन ने हमारी एक नहीं सुनी।
इसके बाद जगतगुरु शंकराचार्य का आदेश आया कि आप प्रतीक पूजा करें और वापस आ जाएं। अब हमारा संकल्प यह है कि हम 11 लाख शिवलिंग प्रतीक स्वरूप वाराणसी में भेजेंगे।
कथावाचकों पर कहा हिंदू राष्ट्र का पहले प्रारूप तैयार कर लिया जाए
गतगुरु शंकराचार्य विमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कथावाचकओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हिंदू राष्ट्र की बात कई बार हमारे सामने आ चुकी है लेकिन पहले इसका प्रारूप तय किया जाए। उसके बाद हिंदू राष्ट्र की बात की जाए लेकिन यह संभव नहीं है।
शंकराचार्य ने कहा कि चारों शंकराचार्य की बात सरकार नहीं मान रही है यह बहुत ही गलत है। सरकार हमको भी एक राजनीतिक दायरे में देख कर बात करती है। नेताओं पर भी उन्होंने कहा कि आजकल नेता ही शंकराचार्य की भूमिका में दिखाई दे रही हैं यह देश और समाज के लिए अच्छा संदेश नहीं है। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा कि हम सिर्फ सनातन धर्म की पैरवी करते हैं।
पत्रकार वार्ता के दौरान शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष डॉक्टर देवेंद्र शर्मा, सूर्यकांत शर्मा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
MP Info News
Invalid RSS feed URL.
ब्रेकिंग न्यूज़
विज़िटर संख्या
अन्य ख़बरें
-
-
-
*हेमू कालानी जन्मोत्सव मिष्ठान वितरण कर बनाया* *
—03/23/2019 -









