वीरांगना बलिदान दिवस मेले की तैयारियां का पवैया ने किया निरीक्षण

Jun 15 2023

ग्वालियर। स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम वीरांगना झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की शहादत की 165 वीं वर्षगांठ पर उनकी समाधि के समक्ष 17 व 18 जून को दो दिवसीय वीरांगना बलिदान मेला आयोजित किया जा रहा है। इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई है। गुरुवार को पूर्व सांसद एवं वीरांगना बलिदान मेला के संस्थापक अध्यक्ष जयभान ङ्क्षसह पवैया ने समाधि स्थल का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश दिये। वीरांगना बलिदान मेला में प्रखर राष्टवादी विचारक शिवप्रकाश व प्रदेश की संस्कृति मंत्री ऊषा ठाकुर शामिल होंगी।
वीरांगना बलिदान मेला के संस्थापक अध्यक्ष पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने बताया की सन 2000 में स्थापित इस राष्ट्र स्तरीय शहीदी मेला का यह 24 वां पुष्प है। बलिदान मेला के प्रमुख समारोह में 18 जून को शाम सात बजे क्रांतिकारी परिजन सम्मान में शहीद राजगुरु के वंशज सत्यशील कमलाकर राजगुरू को सम्मानित किया जाएगा व सरहद पर चम्बल के शहीदों के परिजनों का सम्मान होगा। पवैया ने बताया 17 जून को सांय 6 बजे झाँसी दुर्ग से बुंदेली युवा शहीद ज्योति लेकर ग्वालियर आएंगे, शहीद ज्योति की महाराज बाड़े से शोभा यात्रा निकली जाएगी। वीरांगना बलिदान दिवस मेले की तैयारियां शुरू पवैया ने समाधि स्थल का किया निरीक्षण।
18 जून की शाम अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन होगा। कवि सम्मेलन में  गीतकार संतोषानंद, विनीत चौहान, सुश्री कविता तिवारी, हेमंत पांडेय, गजेंद्र प्रियांशु, जानी बैरागी, शम्भू शिखर, शशिकांत यादव, राम भदावर को आमंत्रित किया गया है।
30 मिनट के नाटक में किरदार निभाएंगे 13 कलाकार
वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान पर प्रस्तुत होने वाले नाटक खूब लड़ी मर्दानी की तैयारियां शहर में जोरशोर से चल रही है। 18 जून को ठीक शाम सात बजे से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर प्रस्तुत होने वाले नाटक की रिहर्सल बाड़ा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर, हरिशंकरपुरम और थाटीपुर में शाम के समय हो रही है। तीनों स्थलों पर 250 कलाकारों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नाटक के लेखक और निर्देशक चंद्रप्रताप सिंह सिकरवार ने बताया कि इस बार की प्रस्तुती हटकर रहेगी। एक घंटे की प्रस्तुती में दर्शकों के सामने 70 दृश्य सामने आएंगे। छह दृश्य बढ़ाए गए हैं, जिनमें रानी के शौर्य, युद्ध नीति और रणनीतियों को शामिल किया गया है। पूरे नाटक में 15 मिनट तक इलेक्ट्रानिक और मेनुअल आतिशबाजी होगी। नाटक तकनीकी और लाइट एंड साउंड बेस पर आधारित रहेगा। रानी का किरदार 13 कलाकार निभाएंगे।
निर्देशक सिकरवार ने बताया कि नाटक को जीवंत बनाने के लिए 12 घोड़ों और दो ऊंटों को प्रस्तुती का हिस्सा बनाया जाएगा। इसके अलावा बैलगाड़ी और बग्घी भी रहेगी। फुल ड्रेस रिहर्सल 17 जून को सरस्वती शिशु मंदिर गोरखी में रखी जाएगी, जिसमें कमियों को पूरा किया जाएगा।
बलिदान मेला वैसे तो अधिकारिक तौर पर कोरोना काल में सीमित किया गया था, लेकिन अब इसके पुराने रूप में लाया गया है। यहां यह बता दें कि पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया महल के धुर विरोधी हैं और हर साल होने वाले इस मेले में वे अपने उद्बोधन के जरिए यह संकेत भी देते रहे हैं। पीछे की कहानी देखें तो सिंधिया के भाजपा में आने के बाद से इस मेले का आयोजन सीमित हो गया था, लेकिन अब ऐसा नहीं है।