अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते जेयू में कामकाज हुआ ठप
Jun 02 2023
ग्वालियर। अपनी मांगों को लेकर पिछले 17 दिन से चरणबद्ध आंदोलन कर रहे जेयू के शिक्षक व कर्मचारी शुक्रवार से अनिश्चतकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इससे छात्रों की समस्याएं और बढ़ गई हैं। इससे पहले कर्मचारी चरणबद्ध आंदोलन के चलते 4 से 5 बजे तक काम कर रहे थे जिससे छात्रों के अति आवश्यक काम हो जाते थे, परंतु कर्मचारियों के इस प्रकार हड़ताल पर चले जाने से विश्वविद्यालय का कामकाज ठप पड़ गया है।
ग्वालियर-चंबल संभाग के 8 जिलों से जेयू में अपने काम को लेकर आए छात्र हड़ताल के चलते अपनी समस्याओं का कोई समाधान होता न देख आज धक्के खाकर वापस लौट गए। अपने मार्कशीट में सुधार, डिग्री आवेदन, माइग्रेशन से जुड़े छोटे-छोटे काम लेकर अंचल भर के सैंकड़ो छात्र आए परंतु उन्हें खाली हाथ ही घर जाना पड़ा।
हड़ताल के दौरान न तो कोई प्रशासनिक या अकादमिक कामकाज हुआ और न ही किसी भी विभाग में छात्रों की कक्षाएं लगीं। ऐसे में जेयू से जुड़े पूरे ग्वालियर- चंबल संभाग के कॅालेजों और उसमें पढ़ रहे हजारों छात्र प्रभावित हो रहे हैं, उनकी न परीक्षाएं समय पर हो सकेंगी, न परीक्षा परिणाम समय पर आएंगे। यह स्थिति कब तक ऐसी ही रहेगी कुछ कहा नहीं जा सकता।
आंदोलनकारी नेताओं का कहना है कि जब तक शासन उनकी सभी मांगों को मंजूर नहीं कर लेगा तब तक विश्वविद्यालय में कोई काम नहीं होगा। हड़ताल के चलते जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध कॅालेजों में स्नातक बीए, बीकॅाम, बीएससी की परीक्षाएं जो दो, पांच और सात जून को होना थीं, उन्हें टाल दिया है। यह परीक्षा कब तक होंगी इसे बता पाना मुश्किल है। जेयू में चल रही हड़ताल जब तक समाप्त नहीं हो जाएगी, तब तक सभी परीक्षाएं प्रभावित रहेंगी।
आंदोलन के चलते शुक्रवार जूटा के अध्यक्ष प्रो. जेएन गौतम, पूर्व कुलसचिव डॉ. डीएस चंदेल, अध्यक्ष गैर शिक्षक कर्मचारी संघ संजय सिंह भदौरिया, स्थाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष तहसीलदार कंसाना, सीताराम शर्मा, अतुल पांडे क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे। धरने में तृतीय श्रेणी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रामअवतार सिंह तोमर, प्रांतीय कोषाध्यक्ष राजेश नायक, अतुल पांडे, फारुख खान, लोकेश चतुर्वेदी, राजकुमार सिकरवार ज्ञान सक्सेना आदि कर्मचारी शामिल थे।
यह हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
शासन के कर्मचारियों के समान सातवें वेतनमान से पेंशन एवं डीए का भुगतान हो। विश्वविद्यालयों में 2007 के पश्चात कार्यरत स्थाई कर्मचारियों को तत्काल वेतन भुगतान किया जाए। स्थाई कर्मचारियों को तत्काल नियमित किया जाकर 7 वां वेतनमान प्रदान किया जाए। मप्र के विश्वविद्यालयों में कुलसचिव के पद पर विश्वविद्यालयीन सेवा अधिकारियों को ही पदोन्नत कर नियुक्ति प्रदान की जाए। समन्वय समिति के निर्णय अनुसार मेडिक्लेम पॉलिसी तत्काल लागू की जाए।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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